रोकर काटी कितनी रातें,राह तकते गुज़ारे जो दिन मधुमय जीवन की बहारें ,झूठी हो गयीं पिया तुम बिन अपनी पीड़ा भूल सजन तुम ,जरा यूँ ही मुस्कुरा देना *पल दो पल उनकी यादों का ,पानी आँखों में भर लेना* *भूले बिसरे पलों को तुम यादों में अपनी बसा लेना* सजा […]
अनेक राह हैं…. लंबी-लंबी सड़कें, उबड़-खाबड़ वीथिकाएं, कच्चे-पक्के रास्ते. बर्फ वाले पहाड़, गहरी तलहटियां, चाय-बागानों की ढलान. उजड़े-बियाबान, घने-वन. हर जगह है मौजूद, इस दुनिया का वजूद. फिर भी,बन न सकी एकछोटी,कच्ची-पक्की राह तुम्हारे और मेरे दरम्यान,, जिसपर चलकर हम आ सके इतने करीब, कि, ‘स्व’ समाहित हो, […]
