आज विद्यालय आते हीं शोभना की नजरें 26जनवरी की ईंचार्ज मैडम कलावती को ढूँढ रही थी।मैडम कलावती भी शोभना से नजरें चूरा रही थी जैसे उनकी कोई गलती पकड़ ली गई हो। मध्यांतर के बाद आखिर शोभना को मैडम मिल हीं गई।उसने बिना देर किए पूछ दिया-“मैडम बस मुझे इतना […]

मन की गति विचित्र      कोई ना मन का मित्र            मन है बड़ा चपल                  इसे तो संभालिये।।               मन है सबका राजा       रहता है सदा ताजा   […]

ब्रह्मचारिणी देवी माँ      नवदुर्गा रूप है माँ          भक्तो को वर देती माँ               भक्ति हमे दीजिये।।1।।             जप माला दाएं हाथ      कमंडल बाएं हाथ            करती है […]

राधे श्याम का एक बेटा था,  वह उसे बहुत प्यार करता था , वह चाहता था , कि उसके बेटे की शादी बहुत धूम-धाम से हो , जैसे हर पिता का अरमान होता है !  राधे श्याम का बेटा आज ऑफिस के काम से १ साल के लिए जर्मनी जा […]

एक बार राधे श्याम की घर की बिजली ख़राब हो गई , उसने अपने दोस्त बलदेव के बेटे राहुल को बिजली ठीक करवाने के बुलाया ! राधे श्याम और बलदेव बचपन के दोस्त थे, इसलिए राधे श्याम के एक बार बुलाने पर बलदेव अपने बेटे राहुल को लेकर राधे श्याम […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।