डा प्रभात कुमार प्रभाकर नई नस्ल के हिन्दी के ऊर्जावान लेखक  हैं. इस बात का अंदाज़ा इसी से लग जाता है कि इस नये साल में ही अज्ञेय पर उनकी दूसरी और कुल चौथी पुस्तक है. अज्ञेय विचार और विमर्श डा प्रभात कुमार प्रभाकर, और डा सत्यदेव प्रसाद के सन्युक्त सम्पादन […]

ना जाने कौन सा रस्ता तलाश      करता हूं कि अब तो मैं भी तुम्ही;सा तलाश करता हूं हमारे जिस्म के हिस्से में गड़ गया था   जो मैं आज तक वही शीशा तलाश करता    हूं वो एक शख्स जिसे देखने   का आदि   था मैं आज तक वही चेहरा तलाश   करता हूं […]

नहीं जैसे सितमगर सोचता है, कभी भी कुछ न पत्थर सोचता है। तुम्हें तकलीफ तो होती ही    होगी, मेरा एहसास बढ़कर सोचता है। ज़रा-सी फिक्र तो करनी पड़ेगी, थका-हारा भी मुड़कर सोचता है। तो फिर अंजाम भी होता है अच्छा,                        […]

इस तरह हम जो उजालों में नहीं आएंगे, हम तेरे चाहने वालों में नहीं आएंगेl   उनको कहने का नहीं देंगे कभी भी मौका, फिर कभी ऐसे सवालों  में नहीं आएंगेl  दर्द बस ये है मुझे भूल गए हैं वो भी, अब कभी उनके ख्यालों में नहीं आएंगेl  उनको हर […]

फूल खुशबू चमक तितलियां आ गईं, माँ के घर जब सभी बेटियाँ    आ गईं। जा के अंदाज़ ताकत का फिर लग गया, जब बगावत में सब लड़कियां आ गईं। मुझको उस पार जाना कठिन जब लगा, फिर दुआ माँ ने की कश्तियाँ आ गईं। ज़िंदगी का मज़ा फिर तो जाने  […]

शहर में जो हुआ कुछ भी नहीं है, हमें इसका पता कुछ भी नहीं हैl हमें कल गाँव को जाना पड़ेगा, वहाँ माँ की दवा कुछ भी नहीं हैl चलो छोड़ो शिकायत और शिकवा, मोहब्बत में खता कुछ भी नहीं हैl उसे ही मुआवजे सरकार देगी, उसी का घर जला […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।