न याद कर तू दर्द भरे वो बीते हुए पल, वो समय असफलता का वह हारे हुए पल । वो  धोखे जो  किए तेरे संग इस दुनिया ने , वो छलावा जो किया तेरे संग तेरे अपनों ने। वो दर्द का समंदर जो उठा था जिंदगी में , वह यादें […]

आज फिर एक नवविवाहिता दुनिया से विदा हो गई मांँ की लाडली पिता की दुलारी मौत की नींद सो गई न बता सकी तकलीफ अपनी न सुना सकी दर्द अपना सही होगी न जाने कितनी पीड़ा डूबी होगी जरुर दर्द के सागर में आज फिर एक बेटी मांँ- बाप से […]

    सदा सत्य पथ पर चले जाना है हवा के है झोंके बहे जाना है। कभी सोचते है,ठहरे इसी पथ बस नीर है हम, बहे जाना है । ठहरी नही जिंदगी भी किसी पथ किसी के लिए ना रुके हम किसी पथ कभी लड़खड़ाये ,तो सोच ले हम यही […]

धन बरसाने आई लक्ष्मी ,घर – घर खुशियाँ छाई। कर दरिद्र कोसों दूर, भण्डार भरने खुद माँ आई।। भावों के दीप सजाकर, देखो कैसी रोशनी आई। अमावस के घोर तिमिर को, जीतने रोशनी छाई।। कतारें सज रही दीपों की, बाजार सजे धजे भाई। रंग बिरंगे नव परिधानों में, सजे हैं […]

आ तो सगला ने हरसावें। इण री शान कदै ना जावें। इरो जस हिलमिलकर गावें। छकड्यो राँका रो। झण्डाें बाघसूरी में लहरावें। बाला साहब री याद दिलावें। नारेल दीपक ज्योत जलावें। छकड्यो राँका रो। इण री अम्बिका माता प्यारी। सती माता लखमा देवी न्यारी। दिहाड़ी माता करती रखवारी। छकड्यो राँका […]

1. किस्मत के भरोसे ना बैठ     सफलता तेरी राह देख रही है     आज हुनर तो दिखलादे     उन्नति तेरी कला देख रही है। 2. आज कर दृण निश्चय    की पत्थर तू पिघलाएगा    और हिम्मत की कलम से लिख    यह जमाना तेरा हो […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।