पावन पुण्य है *सुरसरि*, भारत में वरदान। *देवनदी* कहते सभी, माता सम सम्मान।। . २ कहे *त्रिपथगा* कुम्भ में, मेला भरे विशाल। रीत *जाह्नवी* पुण्य की, भक्ति में,जयमाल।। . ३ *भगीरथी* भू पर बहे, भागीरथी प्रयास। *देवापगा* सदा रहे, भारत जन की आस।। . ४ *मंदाकिनी* का नीर तो, अमरित पान समान। *मोक्षदायिनी* […]
