जब थाने ही कानपुर में बिक जायेगे, फिर कैसे अपराधी पकड़े जाएंगे। जब पूछे जाएंगे ये प्रश्न प्रसाधन से तब प्रशासक भी मूक हो जाएंगे।। जब थाने में मर्डर हो जाता है, सारा थाना मूक हो जाता है। फिर कैसे मिलेगी सजा अपराधी को, न्यायधीश भी कुछ नहीं कर पाता […]

आगरा | गुरूपूर्णिमा के पावन अवसर पर बृजलोक साहित्य कला संस्कृति अकादमी के सौजन्य से एक ऑनलाइन साहित्य साधना एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया | जिसमें देशभर के कलम साधकों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई | जिनमें प्रमुख हैं – डॉ. तुमुल विजय शास्त्री (चन्दौसी – उ. प्र.), […]

श्रावण मास की रिमझिम फुहार बादलो की गर्जना लगे झनकार गुस्से में जब आ जाते है बादल बिजली हम पर गिराते है बादल होती है जन धन की भी हानि आसमान से काल की यही कहानी प्रकृति स्वयं बनाती है संतुलन श्रावण में होते हरियाली उपवन शिव साधना का समय […]

न हम बदले न वो बदले, फिर क्यों बदल रहे इंसान। कल तक जो अपने थे, सब की आंखों में बसते थे। पर अब तो वो सिर्फ, सपनो जैसे देखते है। न हम न वो आये जाएं, अब एक दूसरे के पास।। न हम बदले न वो बदले, फिर क्यों […]

जिनको हमने दोस्त बनाया , वही पीठ पर भोके खंजर। जिनको हमने अपना माना उनके हाथ खून से लता पथ। देखो चीन पुनः सीमा पर, युद्ध करने के लिए आया है । भारत ने भी ठान लिया है , अक्साई भारत बनाना है ।। तम्बू गाड़े या बनाये बंकर , […]

कितने लोग होंगे जो छोटे शहर से राजधानी के बीच ट्रेन से डेली – पैसेंजरी करते हैं ? रेलगाडियों में हॉकरी करने वालों की सटीक संख्या कितनी होगी ? आस – पास प्राइवेट नौकरी करने वाले उन लोगों का आंकड़ा क्या है , जो अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।