1

16,14 की यति पर तनिक नहीं संदेह भक्ति पर,                       गर्व सदा कुर्बानी का| लिखते लिखते चूक गया तू,                   सच में सार कहानी का|| हे बादल उस दिन यदि तूने,   […]

माना कि मां ममता की मूरत होती है, बेटियां भी लक्ष्मी की सूरत होती हैं, बेटे भी वंश के अंश कुल के गौरव होते हैं, वंश को अनंत तक ले वाले सौरभ होते हैं, लेकिन एक पिता मां का अरमान होता है, बेटे-बेटियों के लिए राम और रहमान होता है, […]

यदि औकात पर आ गया अन्नदाता, तो त्राहि-त्राहि मच जाएगी। सत्ता की गोदी में लेटे लोगों, तुम्हारी भी बूढ़ी नानी याद आ जाएगी।। पंचतत्व की भी औकात नहीं है, कि इनका कुछ बिगाड़ सकें। सब मित्र बने हैं बैठे, इन्हें नवबात सिखा सकें।। ये दुनिया के पालनहार यदि, पांव मोड़कर […]

बात ये नही बहुत पुरानी, आओ सुनायें पेड़ो की कहानी. जंगल ,पेड़ कटे तो, धरतीका श्रंगार उजडा, नीरसता छाई  धरती में, मानो वैधव्य सा हुआ मुखडा. धरती हो गई  उदास, छाया खत्म हुई आसपास. सूरज के तेवर बदले, धरती पर वो आग उगले. सूरज की गरमी को अब कौन सोखे, […]

मुझसे हुई आखिर क्या? बात है, तुझसे कभी ना हुई मुलाकात है। अब तो तेरा दीदार पाने को, ये जीवन जैसे वनवास है।। अधूरा चांद, अधूरी रातें, अधूरी यादें, अधूरी तेरी मेरी हर बात है। तुम मुझसे दूर हुई इस कदर, तुम समझी ना कभी मेरा जज़्बात है। तू सिर्फ […]

कॉलेज में कदम रखते ही बिटिया,लगी कि बड़ी हो गई। इस जमाने में वैसे भी बच्ची जल्दी ही समझदार हो जाती है। एक समय था जब संस्कार,शिक्षा,नैतिकता,रिश्तेदारी का सबक परिवार में रोजमर्रा,सहज ही मिल जाता था। अब सबकी कक्षाएं लगती हैl डिप्लोमा-डिग्री से नवाजते हैं। शर्मा जी की बिटिया,अब आधुनिक […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।