सुबह उड़ते-उड़ते पंक्षी बोले, प्यारे बच्चों क्या हाल-चाल हैं। सुबह से तुम लिखते रहते हो, सचमुच सब बच्चे कमाल हैं।। बच्चों कुछ लिखो हमारे बारे में भी, हम कठिन दौर से गुजर रहे हैं। हमकों खाना कहाँ मिलेगा अब, धरा पर मानव जंगल काट रहे हैं।। तोता मैना चिड़िया कोयल […]

पाई जेब न धेला काम जय श्री राम जय श्री राम। अर्थब्यवस्था गिरी धड़ाम जय श्री राम जय श्री राम। बेच पकौड़ा पाओ दाम जय श्री राम जय श्री राम। छल्ल कबड्डी में आवाम जय श्री राम जय श्री राम। दीगर मुद्दे झंडुबाम जय श्री राम जय श्री राम। मेहनतकस […]

न दिल में गम है, न ही गीले और सिखवे। जब साथ हो तेरा, तो क्या गम और सिखवे। इसलिए तो दिल से, तुम्हें चाहते है हम। मेरी धड़कनों में अब, तुम ही तुम बसते हो।। क्या तेरा है पैमाना, मुझे आंक ने का। तेरे मूल्यांकन से मुझे, पता चल […]

जो खो गए है सवाल कही उत्तर उनका भी लाना होगा यह जीवन है एक पहेली सा सच का पता लगाना होगा कहा से आये कहा हमे जाना जीवन का क्या है अफ़साना लक्ष्य कोई अधूरा न रह जाएं अवरोध तोड़ आगे बढ़ जाना जीवन की शाम ढ़लने न पाएं […]

बिहार के सिवान जिले के चैनपुर गाँव के मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे व भौतिक विज्ञान के छात्र रूपेश कुमार, पुत्र- श्री भीष्म प्रसाद, को “राष्ट्रिय आंचलिक साहित्य संस्थान”, हरियाणा द्वारा निस्वार्थ साहित्य सेवा के लिये पूरे भारत से पाँच साहित्यकारो मे जिनमें रुपेश कुमार को भी “भारत भारती” सम्मान से […]

2 दिन का हल्ला गुल्ला है, हिंदी की चीख-पुकार है, हिंदी-हिंदी का शोर है, यह हिन्दी कितनी बोर है, सच में यह कितनी ढीठ है, हुई खूब मिट्टी पलीत है, फिर भी यह हिन्दी जिंदा है? अंग्रेजी लल्ला शर्मिंदा है! हाय-हेलू का जमाना है, इस हिंदी को घर से भगाना […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।