परमात्म ज्ञान जिसको मिला उसका समझो भाग्य खिला सत्य उसको भा जाता है चरित्र उत्थान हो जाता है पावनता का सुख मिलता है शांतिमय सा मन खिलता है प्रेमरस की बहती है गंगा किसी तरह का न हो पंगा परमात्म याद मे खोये रहे रूहानियत मे खुद को डुबोये रहे […]

कोरोना से बचने हेतु सावधानी बरतने व टीके के परीक्षण हेतु आगे आने का किया आह्वान रोहतक। नवंबर 21, 2020। विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय संयुक्त महा सचिव डॉ सुरेन्द्र जैन ने आज रोहतक स्थित पंडित भगवत दयाल शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइन्सेज में कोरोना महामारी से बचाब हेतु बनाए […]

तर्ज : (हम मेहनत कस इस दुनिया से अपना …..) हम आदिनाथ की भक्ति को श्रुतधाम जाएंगे। एक बार नही सौ बार नहीं हम जीवन भर जाएंगे। हम आदिनाथ की……।। माया के चक्कर में पड़कर अपना जीवन तू गवा रहा। और झूठ फरेब करके तू दौलत बहुत कमा रहा। ये […]

कर ले अच्छा काम प्यारे वर्ना फिर पछतायेगा प्यारे मुठ्ठी मे रेत की तरह समय हाथ से फिसल जायेगा प्यारे स्वार्थ मे लिपटे अपने तुम्हारे कभी काम न आएंगे प्यारे आएगी तेरे जाने की बारी अकेला ही तू जायेगा प्यारे जिनको अपना समझ रहा है वे ही पांचो विकार है […]

प्यार भरा हो हर रिश्ते में,गलतफहमी से ना हो विदाई! दीवाली का पर्व आया, चलो दिल की भी करें सफाई!! सम्मान हो हर फौजी का,किसान ना सड़को पर आए! अपनापन दिखे हर किसी मे,नालगें कोई हमको पराये! हर पेट को रोटी मिले, गरीबी व बेरोजगारी मिट जाए! बरसात हो ऐसी […]

कापी का कोरा पन्ना फाड़ा और उसे एक आकार दिया शायद वह कागज का ऐरोप्लेन बन गया था अपने नन्हे-नन्हे हाथों को अधिकतम उंचा उठाकर हवा में उछाल दिया, कुछ दूर तक हवा में तैरने के बाद वह कागज वापिस आकर नीचे गिर गया………फिर उसे उठाया और फिर उछाला……..अबकी बार […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।