आज अपने ही सुजन कितने दलों में बँट गये, कुछ सहज गद्दार लोगों से ही नाहक पट गये! ००० जिनका परिचय वास्तव में गोष्ठियों से ही बढ़ा, मंच क्या उनको मिला वह गोष्ठियों से हट गये! ००० साथ देने का वचन जो नित हमें देते रहे, आज वह अपने ही […]

(1) नमस्कार भी है नहीं,उनको क्यों स्वीकार। मेरी अच्छी पोस्ट भी,देते वह दुत्कार।। देते वह दुत्कार,रहें निज भौंहें ताने। तुले हुए जो लोग,झूठ को सत्य बताने।। कह सतीश कविराय,न उगलें निज गुबार भी। सरस नहीं स्वीकार,है जिनको नमस्कार भी।। (2) मंच दिलाने बढ़ रहे,प्रतिभाओं को चोर। कलियुग की महिमा सरस,फैली […]

मंच लूट लै गये जुगाड़ू अब का कल्लँय, हम रय जेमै सदा पिछाड़ू अब का कल्लँय! ००० साफ़-स्वच्छ जग्घा पे अकड़ू आन विराजे, हमरे हिस्से में बस झाड़ू अब का कल्लँय! ००० इतै-उतै की धरैं समैटैं हैं जो कविता, बने मंच के बेई साड़ू अब का कल्लँय। ००० डटे भीड़ […]

प्रखर प्यास अंतर में भरकर गुज़र रहा जीवन, हाथ गहा न किसी ने हँसकर गुज़र रहा जीवन! प्यासे लोचन प्यासी धड़कन प्यासी उर की चाह, बना प्यास का उद्गम अंतर गुज़र रहा जीवन! मिली नहीं सौन्दर्य कुमारी मुझको सपने में, केवल रूप-पुजारी बनकर गुज़र रहा जीवन! प्यारा यौवन अब ढलान […]

धान रोपते हैं श्रमिक,उतर खेत के बीच। जैसे अपने खून से,रहे खेत वह सींच।। हरियाली भाती बहुत,निज आँखों को मीत। प्रकृति कहे करिए सहज,हरियाली से प्रीत।। पानी में डूबे हुए,दिखें श्रमिक के पाँव। सिर पर रखकर टोकरी,विचरें श्रम के ठाँव।। धान रोपकर शाम को,जाते अपने गेह। रोजी-रोटी के लिए,करते श्रम […]

भावों से जन्मे जो है सिर्फ़ वही कविता, जो सोच के लिखता वो लिख सकता नहीं कविता! ००० जब-जब भी क़लम लेकर मैं बैठता हुँ लिखने, तब-तब ऐसा लगता ख़ुद बोल रही कविता! ००० डूबे हैं अहं में जो पग से लेकर सिर तक, बोलो,उनके दिल में कब-कब है बही […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।