कल शाम सब्जी मंडी में, मीनेष और मै, एक  दुकान से तरकारी खरीद रहे थे, दोनो समीप ही थे, मोल भाव किया, तरकारी खरीदी, लाख प्रयास के बाद भी मीनेष नजर बचाते हुए चल दिया। दूसरा दिन, अलसुबह चेहरे की किताब (फेस बुक )पर नजरे दौड रही थी, तभी मीनेष […]

आज सुबह से ही फ़ेसबुक, व्हाट्सएप, ट्वीटर भरे पड़े है, एक पोस्ट के बाद, लाईक, रिप्लाय और कितने लोगों ने पोस्ट देखी,  इस कौतुहल में शाम कब होगी पता ही नही चलेगा। समय-समय की बात है। सोशल मीडिया, पर बने रहना, आज की जिंदगी में मायने रखता है, लिहाजा  आज […]

पिछले दिनों, मां शीतला सप्तमी का त्यौहार और महिला दिवस एक ही दिन होने से पूरा दिन मातृशक्ति को समर्पित रहा है । पहला त्यौहार मां शीतला की अराधना में तथा ठंडा प्रसाद खाकर, घर-घर में शीतलता बनी रही, वही दूसरी और समूचे समाज ने नारी शक्ति पर ढेरों कार्यक्रम […]

स्वर्णिम आभा बिखेरते हुए सूरज ने किया श्रृंगार रम्भाति गायो के झुंड में लौट आई शक्ति अपार धूल उडाती पगडंडी और पक्षी करते मनुहार लो आ गई गोधूलि बेला गीत गाओ हजार मंदिरो में बजती घंटी और चोखट पर है इंतजार लो आ गई गोधूलि बेला करो दिल से सत्कार। […]

अब सफलता ज्ञान से नही, धन-बल से आंकी जाती है, किताबे पठन-पाठन हुआ दूर मोबाइल पर नजर आते है, कार-बंगले सोना-चांदी है लुभाते सबको, संस्कार कोसो दूर नज़र आते है, माँ-बाप को कभी पूछा नही और मन्दिर-मन्दिर शीश झुकाते है, अजीब सोच है इंसा की हाथ पर हाथ धरे बैठे […]

आज बारिश में भिगकर भी,  तेरे इश्क का पैगाम लिखता हूं। नन्हीं- नन्हीं हर एक बूंदों को, बस तेरे हीं नाम करता हूं।। मैं डरता हूं फिर सहमता हूं , कि इन्हें तेरे पास कैसे? पहुंचाए। नन्ही- नन्ही बारिश की बूंदें, कहीं? धराविलिन न हो जाएं।। यदि धराविलिन हो गई […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।