जयजयजयजयअटलबिहारी । राजनीति भी तुमसे  हारी।। पच्चीस दिस सनचौबिसआई। अटल बिहारी जन्में भाई।। कृष्ण बिहारी पिता तुम्हारे। जो शिक्षक थे सबसे न्यारे।। कविता साहित्य खूब रचाये। दीन दुखिन  को लगे लगाये।। भाषण व्यंग्य कविता गाई। हिन्दी भाषा मुकुट बनाई।। राष्ट्रसंघ  में  भाषण  दीना। सारे जग ने हिन्दी चीह्ना।। सन सत्तावन […]

कृष्ण कन्हैया श्याम है,मोहन ब्रजगोपाल। दीनबंधु राधारमण,दुखहारक नंदलाल॥ समान अर्थ के शब्द में,भाषा का है ज्ञान। शब्दों की कर साधना,कहते कवि मसान॥ सरस्वती भारती माँ शारद। ब्रह्मासुत ज्ञानीमुनि नारद॥ पवनतनय कपिपति हनुमाना। राघव रघुवर राजा रामा॥ वानर बंदर मरकट कीशा। भगवन ईश्वर प्रभु जगदीशा॥ अम्मा जननी अम्बा माता। पाँव चरण […]

सीफर से तो शुरु भयो,            पहाड़ जैसा पाय। सम विषमाभाज अभाज,           संबंधी बन जाय॥ लाभ हानि के अंक में,          जीवन बना गणित। आयु तो नित घट रही,       अनुभव जुड़ता मीत॥ गुणा-भाग दिन-रात से, […]

पन्द्रह जून को सदा, शाला उत्सव जान। माथे तिलक लगाइए,शारद का हो गान॥ पुस्तक दीजे हाथ में,खीर-पूरी भी साथ। गुरु-शिष्य मिल बांचिए,ले के पुस्तक हाथ॥ मास जुलाई लागते,गणवेशा सिलवाय। काम पूरा कीजिए, कहते हैं  कविराय॥ मास अगस्ता मध्य में,लो झंडा फहराय। खीर-पूरी का भोज दे,सभी पेट भर खाय॥ सितंबरा में […]

छोटे-से धार्मिक विवाद में साम्प्रदायिक दंगा आग की तरह पूरे शहर में फैल गया। मारपीट,लूटपाट,गाली-गलौच,चीख-पुकार,पत्थरबाजी,खूनखराबे से शांत गलियाँ हाहाकार करने लगी। भीड़भाड़ की करुण पुकार और बेरहमियों के अत्याचार की गूँज काॅलेज से घर-घर लौटती हुई लड़कियों ने सुनी,यह विकराल दृश्य देखकर वे डर से काँपने लगी। चार आतताईयों के […]

बेटी हिन्दी संस्कृता,अंग्रेज़ी का ज्ञान। उर्दू अरबी फारसी,बहुभाषा सम्मान॥ बेटी हिन्दी की विधा,धारे रुप अनेक। व्याकरण के ज्ञान से,करती अलग विवेक। बेटी कहानी रुप है,कविता आतम मान। रेखाचित्रा लघुकथा,निबंध पत्र को ज्ञान। नाटक अरु एकांकी,अरु कहो उपन्यास। डायरी अरु संस्मरणा,हिन्दी का इतिहास॥ यात्रा वृत्तांत है,भेंटवार्ता वार्ता आन। जीवनियाँ,आलोचना,गद्य विधा का […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।