अंगरेजी चालीसा 

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dashrath
निशिदिन के अभ्यास से, बिसरी विद्या आय।
बिन अंगरेजी ज्ञान के, कोई पूछत नाय ।।
जय जय जय अंगरेजी माता।
तुम्हरी कीरति सब जग गाता।।1
ए  से  एपल  बी  से  बेबी।
नइ पीढी  ने तुमको सेवी।।2
कटबटहट सब एक समाना।
पुट का भेद हम नही जाना।।3
पश्चिम की तुम हो महरानी।
पूरब में भी खूब बखानी ।।4
नित उनके तुम्हरे गुण गाऊँ।
कम्प्यूटर पे ध्यान लगाऊँ।।5
पाँच स्वरों का रेलम पेला ।
इक्किस व्यंजन का ये मेला।।6
वरण छब्बीस का परिवारा।
ध्वनि छियालीस का है न्यारा।।7
जो कोई तुमको अपनाता।
आम जनो पे धाक जमाता।।8
इंग्लिश को पढ सब संसारा।
फोनिकड्रिल का खेलहि प्यारा।9
हिन्दी में हि वोट जो पाते।
संसद में तुमको अपनाते।।10
पेंट कोट टाई दिखलाते।
अंग्रेज़ी का मान बड़ाते।।11
बैंक डाक कानून की भाषा।
सबको पाने की अभिलाषा।।12
बंका गाँव मंदिर बनवाया।
आपनि मूरत को सजवाया।।13
एक हाथ कंप्यूटर सोहे।
दूजे कर में लेखनि मोहे ।।14
हाय हलो से करें आरती ।
अहम् नयन तुम्हे निहारती ।।15
पिज्जा बर्गर भोग तुम्हारा।
खुशी खुशी खावे संसारा।।।।16
तिहरे दम से डाक्टर बन जाते।
इंजिनियर टीचर पद पाते।।17
जो भी निंदा करे तुम्हारी।
कष्ट उठाये वह बड़ भारी।।18
साॅरी कहने से दुख कटते।
थैंक्यू गुडबाय भी रटते।।19
शेक्सपियर ने तुमको पाया।
सारे जग में नाम कमाया।।20
कीट्स इलियट फेनी बरनी।
क्रिस्टी मिल्टन फ्रांसि बटर्नी।।21
डेफा शैली ग्राहम ग्रीना।
विलियम ब्लेका आइंस्टाइना।।22
वर्डवर्थ अरु टामस थामस।
बेंथम मैथ्यु लेखक फेमस।।23
संस्कृत भाषाओं की नानी।
 हिन्दी माता है हम जानी।।24
अंगरेजी को सब जग जानी।
घर घर में है सकल बखानी।।25
संस्कृत जानो हिन्दी मानो।
डिग्री लेटर की पहिचानो।।26
ईस्ट वेस्ट नार्थ साउथ।
डायरेक्शन के है माउथ।।27
सी से ‘स’ अरू ‘क’ बन जाते।
सीमेंट सर्कस में हम पाते।।28
फोनिक ड्रिल का ध्यान जो धरते।
वे नर कभी गलती न करते।।29
ए बी सी डी रट रे भाई।
तुरत तरक्की झट हो जाई।।30
रोमन लिपि में तुमको लिखते।
अपटूडेट भी वे हि दिखते।।31
नाउन प्रोनाउन एडजक्टिव।
वर्ब से हो जाओ एक्टिव।।32
पार्ट ऑफ स्पीच हैं आठा।
 टेन्स का कीजे निज पाठा।।33
डिक्शनरी शब्दों का उपवन।
कठिनाई में देखें सब जन।।34
पांच सात चौदह को जानो।
सुन्दर लेखन मंत्र है मानो।।35
मल्टी मीडिया में तुम आई।
इन्वेंशन की धूम मचाई।।36
नर नारी का भेद मिटाया।
धरती पर है तेरी माया।।37
मोबाइल पर छाप तुम्हारी।
ट्युटर वाटा फेस विचारी।।38
जो कोई अंगरेजी चाहे।
नित अभ्यास करे मन लावे।।39
जयजयजय अंगरेजी  मैया।
पार  लगाओ मेरी नैया।।40
नित नवीन इस ज्ञान को,सदा नवाओ माथ।
अब टेकनिकल के युगा,कम्प्यूटर भी साथ।।
                                                       #डाॅ दशरथ मसानिया आगर 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।