कभी जो थे मासूम से सूने-सूने बादल | अब दिखा रहे तरह-तरह के रंग बादल || झमा-झम-झम झड़ी लगा रहे | तड़ा-तड़-तड़ बिजली चमका रहे || कभी छोटीं तो कभी बड़ीं-बड़ीं बूंदें | सुन गड़-गड़ की ध्वनि बच्चे आँखें मूंदें || जब जोर-शोर से बरसे पानी | छतरी खोल बाहर […]

सुबह का अखबार शाम को रद्दी हो जाता है यह तय है पर इस बार अखबार सुबह-सुबह ही रद्दी हो गया। ये चंदू भैया के जीवन में किसी हादसे से कम नहीं है। पूरे चार रुपये का अखबार चंदू भैया को लेना पड़ रहा है। वो भी मजबूरी में। क्योंकि […]

कभी न देखे है ख़्वाब इतने नकाब में ही नकाब इतने थे जाने को जो शिताब इतने है दर्द भी क्या बे हिसाब इतने है दर्द के क्या सवाल तेरे जो तन्हा तन्हा जवाब इतने छुपी हुई तन्हाई है मेरी है ज़िन्दगी में जो बाब इतने है मेरे मुश्क़िल हालात […]

पिपासा तृप्त करने प्यासी धरा की बादल प्रेम सुधा बरसाने आया है अब तुम भी आ जाओ मेरे जीवन प्रेमाग्नि जलाने सावन आया है देखकर भू की मनोहर हरियाली नभ के हिय में प्रेम उमड़ आया है रिमझिम फुहारें पड़ीं तन पर जब मन अनुरागी तब अति हर्षाया है प्रेम […]

हंसते चीखते गली मोहल्ले, अब वीरान से हो गए है। शहर के सारे चौहराये, अब सुनसान हो गए है। पर घर परिवार के लोग, घरों में कैद हो गए है। और परिवार तक ही, अब सीमित हो गए है। और बनाबटी दुनियाँ को, अब वो भूल से गये है।। महानगर […]

जगत गुरु कहे जाने वाले देश भारत के युवाओं के चहुँमुखी विकास में सबसे बड़ी बाधा है नशा । नशा शब्द सोचते ही दो प्रश्न उठते है – क्यो ? ओर कौन जिम्मेदार है? कुछ लोग इसके लिए व्यक्ति संगती को जिम्मेदार ठहराते है अपितु असल समस्या कुछ और है। […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।