प्रिय रामभक्तों, भवदीय युगपुरुष स्वामी परमानन्द गिरि महंत नृत्यगोपालदास अखण्ड परमधाम, हरिद्वार मणिरामदास छावनी, अयोध्या सदस्य, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र अध्यक्ष-, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र एडवोकेट आलोक कुमार जस्टिस विष्णु सदाशिव कोकज कार्याध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद अध्यक्ष, -विश्व हिन्दू परिषद जारी कर्ता : विनोद बंसल प्रवक्ता-विहिप Post Views: 7

मैं निडर उद्दंडतापूर्वक लिख रहा हूँ। तो ही कौडियों के भाव बिक रहा हूँ।। तुम्हारे ठुकराने व दुत्कारने पर देखो। मैं तो सर्वश्रेष्ठ भी अत्याधिक रहा हूँ।। अंतर कहां पड़ता है मूर्ख नासमझो। मैं राष्ट्रभक्त और अध्यात्मिक रहा हूँ।। भले बेचे समाचारपत्र मैंने सड़क पर। फिर भी देखो सम्पन्न आर्थिक […]

समय कोई स्थाई नही होता समय किसी का सगा नही होता समय बुरा है तो अच्छा आएगा समय प्रमाण अपना बताएगा जो आज है कल नही रहेगा तमस के बाद उजाला आएगा उदासी त्यागों समझो प्रकृति को अब तो समझो संकट प्रवर्ति को जहां उपचार नही बचाव बेहतर है लापरवाही […]

इक छोटा सा वायरस,दहशत में संसार। कोरोना ने रोक दी,जीवन की रफ्तार।। साफ-सफाई स्वच्छता,साबुन का उपयोग। कोरोना की श्रृंखला,तोड़ेंगे हम लोग।। धर्म,जाति,मज़हब नहीं,ऊँच,नीच ना रंग। कोरोना का वायरस,करे सभी को तंग।। क्यों दें हम परिवार को,जीवन भर की टीस। दृढ़ता पूर्वक काट लें,घर में दिन इक्कीस।। रखें दूरियाँ जिस्म से,दिल […]

प्रेम की बातें अचानक बेइमानी हो गई आजकल तो प्रेम करना जान जानी हो गई। ना करूं स्पर्श उनका ना लगाएं अब गले पहले क्या था और देखो क्या कहानी हो गई।। देखकर मुझको वो खुद मेरी दिवानी हो गई लत मोहब्बत की लगी और वो रुहानी हो गई। अब […]

हमने गरीब बन कर जन्म नहीं लिया था हां, अमीरी हमें विरासत में नहीं मिली थी हमारी क्षमताओं को परखने से पूर्व ही हमें गरीब घोषित कर दिया गया किंतु फिर भी हमने इसे स्वीकार नहीं किया कुदाल उठाया, धरती का सीना चीरा और बीज बो दिया हमारी मेहनत रंग […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।