रहिए हमेशा कर्मरत यह कर्म ही तो धर्म है। संवाद होते हैं मधुर प्रतिकूल लेकिन कर्म हैll    संसार माया मोह का पहने कवच ऐसा खड़ा, है भेदना सम्भव नहीं,कितना कठिन यह वर्म हैll   परवाह करता कौन है कोई दुखी हो या मरे, समझा कोई सकता नहीं,दुनिया बड़ी बेशर्म […]

राजनीत का गेट खुला है, सबको अंदर आने दो, कपट-द्वंद के वाद्ययंत्र पर सबको मंतर गाने दो। अपनी झांकी आगे रखता, हर शख्स यहां पर नेता है, भर चातुर्मास परकम्मा करता दिग्गी भी अभिनेता है। देख लचीलापन खेमों में इनकी नीदें खुलती हैं, चैन चुनावी बिन सोने की,हीरा भाव में […]

वेदनाओं में मधुर मुस्कान लिखता हूँ, नफरतों में प्रेम का मैं गान लिखता हूँ। ऐ मेरे खाक-ए-वतन तू रुह है और जान मेरी, शौर्य गाथा में तेरे मैं जमीं आसमान लिखता हूँ। भाव विश्व वन्धुत्व का है दिल-ए-जर्रो में तेरे, सत्य,अहिंसा,प्रेम,दया का मैं आन लिखता हूँ। है ‘शिवम्’ ख्वाहिश मेरी,हो […]

ख़ुशी और उल्लास छाया, दीपावली का त्यौहार आया।     रोशनी की जगमगाहट,      प्रेम का संदेश लाया॥    नफ़रतों का दहन करने,     दीपावली का पर्व आया।    कार्तिक की अमावस से लड़ने,     पुनीत पावन पर्व आया॥                 […]

काट औ छाँट जो रही जग में, दाग बेदाग़ जो रहे मग में; बढ़ा सौन्दर्य वे रहे प्रकृति, रचे ब्रह्माण्ड गति औ व्याप्ति। कष्ट पत्ती सही तो रंग बदली, लालिमा ले के लगी वह गहमी; गही महिमा ललाट लौ लहकी, किसी ने माधुरी वहाँ देखी। सेब जो जंगलों में सेवा […]

मैंने स्वर्ग को… धरा पर उतरते देखा है। देवताओं को भी… चहल-पहल करते देखा है। ये जो मेरा घर है न… इसमें मैंने हर रुप को संवरते देखा है॥ यहाँ हिन्दुओं से विशेष स्नेह नहीं … न ही मुस्लिमों से परहेज़ है कोई। ये जो मेरा घर है न… इसमें […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।