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रूठे सागर को मनाने का हुनर आता है, चांद काे ख्वाब दिखाने का हुनर आता है l दर्द काे फूल-सलीके से बना देते हैं, जिनको हर जख्म भुलाने का हुनर आता है l पल में सो जाता है आंचल में बिलखता बच्चा, मां को क्या खूब सुलाने का हुनर आता […]

उम्दा  मोहब्बत   परवाज़   करते हैं, वो जो इंकार से  आगाज़   करते हैं। मुझे देखते ही जो नजर फेर लेते हो, क्या बेरुखी का वो रियाज़ करते हैं। मतलब की है दोस्ती मतलबी जहां, गरज निकलते ही  नाराज करते हैं। गमों में मेरे  खुश  हो जाते  हैं रिश्ते, […]

  सावन रितु आई, बरसात की है झड़ी लगाई, झूले पड़ गए डाली-डाली, हर गौरी है इतराई। बिजुरी पागल-सी दमक रही, अँगड़ाइयाँ लीं बादल ने, झूमती-इठलाती गौरी ने, मदमस्त मदमाती पींग बढ़ाई। मौसम पागल, दीवाना-सा, पहन पायल कैसी हवा चलाई, रिमझिम बूँदें लगीं बरसने, दामिनी ने ज्योति चमकाई। अल्हड़ वर्षा […]

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यही कोई दस साल पहले की बात है,जब मैं अफ्रीका में एक योजना पर काम कर रहा था। हमारा कैम्प शहर से काफी दूर था,जो जंगल और पहाड़ियों का मिश्रित इलाका था। दिन में तो फिर भी योजना में काम करने वाली कंपनियों की गाड़ियां और आते-जाते लोग दिख जाते थे,लेकिन शाम होते-होते सन्नाटा-सा […]

जब-जब लौटता हूँ अतीत में यही पाता हूँ कि पहले और अब में बहुत बड़ा फर्क है उतना ही कि जितना निष्कलुष बचपन और स्वार्थ भरी जवानी में वात्सल्य और वासना में आग और पानी में ज़मीन और आसमान में माघ-पूस और जेठ के तापमान में l यानि कि, उतनी […]

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ये क्या कहा,ये कैसी हैरानी की बात की, सहराओं के प्यासों से क्यूँ पानी की बात की। मिलता रहा सुकून मुझे उसके शानो पर, फिर इश्क मोहब्बत के मानी की बात की। एहसास कभी उसके भुलाने को जो चले, हर शख्स से फिर उसकी निशानी की बात की। लैला नहीं,सोहनी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।