वैसे तो अठारहवीं सदी से ही महिलाओं की दीन-हीन दया को लेकर कुछ सुधारवादी लोगों ने चिंता व्यक्त करना शुरु कर दी थी,पर चार लोगों की आवाजे इतने बड़े देश में कौन सुनता है,पर उन्होंने स्त्री मन के किसी कोने में यह आशा जगा दी थी कि, तुम भी इस […]

परिंदों संग हर मस्तियां छोड़ आए गांव में हम कितनी हस्तियां छोड़ आए   यूं तो इक घर की दहलीज छोड़ी थी हमने लगता है अब कई बस्तियां छोड़ आए   उलझनों की ये शब अब नहीं बिताई जाती आम की छांव तले निंदिया छोड़ आए   अब कोई दिल […]

ज़िम्मेदारी नहीं अभी, अपनी बारी नहीं अभी। जैसे-तैसे जीत गए, वैसी पारी नहीं अभी। वक़्त नींद का हुआ भले, पलकें भारी नहीं अभी। अगल-बगल ही प्यादे हैं, मात हमारी नहीं अभी। थोड़ा वक़्त कठिन है बस, पर लाचारी नहीं अभी।   #प्रदीप कान्त परिचय : इंदौर में केट कालोनी निवासी […]

जीवन के कोरे कागज पर,कर्मों की गाथा लिख दे, विस्तृत नील गगन पर,सफलता की परिभाषा लिख दे। शिखर ये सफलता का,कर रहा तेरा आव्हान, विपत्तियों से लड़कर,बन कुशल-दिव्य-ज्योति-नूतन। अब तोड़ अपनी निद्रा को,मन की अभिलाषा लिख दे, विस्तृत नील गगन पर,सफलता की परिभाषा लिख दे। तू कायर है तो हार […]

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शब्द ही शब्द है शब्द ही निशब्द है, शब्द ही सत्य है शब्द ही असत्य है.. शब्द ही आलाप है शब्द ही विलाप  है, शब्द ही राग है शब्द ही विराग है.. शब्द ही आत्मा है शब्द ही परमात्मा है, शब्द ही शब्द है शब्द ही निशब्द हैl शब्द ही […]

यहा प्यार वाली,म्यूजिकल फैंटेसी फिल्म है,जो भरपूर जादू और डार्क फेंटेसी से भरी है। छोटी-सी कहानी यहाँ है कि,एक प्रिंस को श्राप मिलता है कि,जब तक सच्चा प्यार न कर ले, दानव बना रहेगा और सारे नौकर- चाकर घरेलू सामान बने रहेंगे। तब फिल्म की नायिका एमा से मुलाकात और […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।