गूँगे बैहरो की बस्ती में क्या बोलेगा सुनेगा कोई। बस अंधो की तरह बैठकर भीड़ बड़ा देगा। देख दृश्य यह आयोजक बहुत खुश हो जाते है। और अपने को स्वयं ही बहुत महान बताते है।। गूँगे बैहरो की बस्ती में क्या बोलेगा सुनेगा कोई..। नजारा आजकल ऐसा ही बहुत चल […]

‌” नारी तुम केवल श्रद्धा हो ‌विश्वास रजत नभ पग तल में ‌पीयूष स्रोत सी बहा करो ‌जीवन के सुंदर समतल में “ ‌ जयशंकर प्रसाद जी ‌हे नारी ! तुम क्या हो आज तक यह कोई नहीं समझ पाया है। तुम तो माता हो, बहन हो, पत्नी हो, मातृभूमि […]

मान मिले सम्मान मिले, नारी को उच्च स्थान मिले। जितनी सेवा भक्ति वो करती। उस से ज्यादा सम्मान मिले। यही भावना हम भाते, की उसको यथा स्थान मिले।। कितना कुछ वो, दिनरात करती है। घर बाहर का भी देखा करती है। रिश्तेदारी आदि निभाती। और फिरभी वो थकती नहीं।। किये […]

फैशन का यह दौर सुहाना लगता है। अच्छा खासा मर्द जनाना लगता है। पल भर में कैसे बदलते है नक़्शे। अब तो हर लड़का शबाना लगता है। फैशन का यह दौर सुहाना लगता है। अच्छा खासा मर्द जनाना लगता है।। कैसे कैसे वो परिधान को पहनता है। और कैसा कैसा […]

तेरा मेरा नाम आजकल जुबा पर लोगों के रहता है। मोहब्बत के चर्चे भी दोनों के बहुत होते है। मोहब्बत कहते है किसे उदाहरण हमदोनों के देते है। और अपनी मोहब्बत को हमारे नामो से जोड़ते है।। मोहब्बत की कश्ती को तैयराना आसान नहीं होता। मोहब्बत कश्ती है तो हम […]

सफल जन्म मेरो भायो मानव जीवन पा कर। धन्य हुआ मानव जीवन माँ बाप के संग रहकर। कितना कुछ वो किये मुझे पाने के लिए। अब हमारा भी फर्ज बनता है उनकी सेवा आदि करने का।। सफल जन्म मेरो भायो मानव जीवन पाकर।। सब कुछ समर्पित किये वो लायक मुझे […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।