जिंदगी का अब कोई भरोसा नहीं है। अभी तो जिंदा है पर अगले पल का पता नहीं। आज मैंने मौत को नजदीक से निकलते देखा। और अपने परिजन को बात करते करते जाते देखा।। मानव जन्म मिलने का जो विचार मन में आया। उन्हें लब्जो में हम व्या कर सकते […]

हर पल आती याद मुझे कभी न पाता भूल उन्हें वह ईश्वर का ही रूप थी मेरे जीवन का मूल थी कांटा अगर चुभता मुझे दर्द से वह करहाती थी पाला पोसा था मुझको कष्टो से दूर रखा मुझको मेरे चेहरे की मुस्कान को खिलौना खुद बन जाती उनकी पूजा […]

साक्षी का बयान अब उसकी भाषा में लिखना होगा भारतीय भाषा अभियान की एक और मांग को स्वीकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के तीन मा. न्यायमूर्तियों ने आज एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। ६-माह के अंदर सभी उच्च न्यायालय को फौजदारी के मुकदमों में कई फेरबदल करने होंगे। जिनमें से […]

कोरोना काल में खाली होते सरकारी खजाने के लिए सरकार को बनाना होगी ‘काम नहीं तो दाम नहींʼ की नीति। इसके तहत जो अधिकारी-कर्मचारी निरंतर सेवायें नहीं दे रहे हैं, लाकडाउन के कारण निरंतर घरों में रहकर बेतन सहित अवकाश आ लुत्फ ले रहें हैं और उन्मुक्त विचरण कर रहे […]

लेखक संघ के प्रचारक रहे है, उन्होंने अपनी इस छोटी सी पुस्तक में भारत के संतों के आविष्कार, भारत के दर्शन, भारत की अतीत में विश्व गुरु की भूमिका को अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया। भारत पर हुए आक्रमण व आक्रमण के बाद जनता के दृष्टिकोण की भी विस्तृत व्याख्या […]

सद्चिन्तन करते रहो जब तक घट मे प्राण हर सांस को मान लो अपना आखिरी प्राण मन मे रहे परमात्मा जीव्हा पर हरि नाम पापमुक्त हो जाओगे मिल जायेगे भगवान जितना पुरुषार्थ करोगे उतना फल देंगे भगवान गीता मे यही कहते है अपने शिव भगवान।#श्रीगोपाल नारसन

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।