#शालिनीकानपुर उत्तरप्रदेश
उनसे वो पहली ही मुलाकात थी,
जैसे चाँद और तारों की बारात थी
मिले ख़्वाब जगने लगे ज़ज्बात,
रूमानी सी वो अनोखी रात थी
झिलमिल सितारों से भरा आसमां था,
“मैं” और “हम” का मिलन आज था
सर्द सी रात हाथों में हाथ था,
लब खामोश धड़कनों का शोर था
मिल रहे दो ख़्वाब थे जग रहे अरमां थे,
साँसों का मिलन जन्मों का आलिंगन था
ये कैसी आग थी जो नम होकर जल रही थी
मानो पिघलता जैसे कोई मोम था,
झुकी पलकें थीं थमीं धड़कनें थीं
ये दो दिलों के मिलन की दास्तां थी या
थिरकते लबों की अनकही कहानी थी
Next Post
पर्यावरण का सबसे बडा मित्र मनुष्य
Sat Jun 2 , 2018
पर्यावरण कहे या पंचतत्व मतलब पानी आग, हवा, आसमान और जमीन। यही संसार और जीवन का मूलाधार है। इसी में हम जन्म लेते है और विलीन हो जाते है। यह स्वच्छ तो हम स्वस्थ नहीं तो सब नष्ट। बदतर हालात नष्ट-भ्रष्ट की ओर ही ईशारा कर रहे है। लिहाजा, पर्यावरण […]

पसंदीदा साहित्य
-
May 8, 2021
संघर्ष
-
April 20, 2017
अब तलवार उठा के लिख
-
May 25, 2019
बड़ी जीत ने मोदी के सामने खड़ी की बड़ी चुनौती!
-
November 21, 2019
माँ
-
December 22, 2020
चिंतन
