भूल गए हो तुम…

Read Time3Seconds
ajay jayhari
हो गए इतने मशगूल कि फूल गए हो तुम,
अंधे माँ-बाप का दर्द भूल गए हो तुम।
पत्नी से पूछते हो-शाम को कहाँ चलना है,
माँ-बाप के दो समय के खाने का वक्त
भूल गए हो तुम…।
हो गए इतने मशगूल…॥
बांध आए जिन्हें तुम वृद्धाश्रम के खूंटे से,
एक खिलौने की खातिर जिनसे तुम रुठे थे।
किया किस कदर तुम्हारी ख्वाहिशों को पूरा,
रह गया उनका खुद का ख्वाब अधूरा।
भूल गए हो तुम…।
हो गए इतने मशगूल…॥
पाल-पोसकर बड़ा किया जिन हाथों ने,
किया परेशान तुम्हारी बेबाक बातों ने।
हुआ बंटवारा जिस दिन जायदाद का,
झूल गए हो तुम अपने बूढ़े होते माँ-बाप को।
भूल गए हो तुम…।
हो गए इतने मशगूल…॥
जिस दिन उठी अर्थी घर से माँ-बाप की,
दे न पाए कांधा पलभर भी आत्मा हताश थी।
सूना-सूना था घर,कमी खल रही थी माँ-बाप की,
बगिया उजड़ गई हो जैसे गुलाब की।
भूल गए हो  तुम…।
हो गए इतने मशगूल…॥
            #अजय जयहरि
परिचय : अजय जयहरि का निवास कोटा स्थित रामगंज मंडी में है। पेशे से शिक्षक श्री जयहरि की जन्मतिथि १८ अगस्त १९८५ है। स्नात्कोत्तर तक शिक्षा हासिल की है। विधा-कविता,नाटक है,साथ ही मंच पर काव्य पाठ भी करते हैं। आपकी रचनाओं में ओज,हास्य रस और शैली छायावादी की झलक है। कई पत्र-पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन होता रहता है।
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

महंगा वर

Tue Jan 16 , 2018
न खेती है,न बाड़ी है,न घर है। फिर भी देखो कितना महंगा वर है॥ मन में उमंग नहीं,जीने का ढंग नहीं। जीवन के सागर में एक भी तरंग नहीं॥ सभ्यता-संस्कार नहीं,सोच में निखार नहीं। आपस में प्यार नहीं,शिक्षित परिवार नहीं॥ काला अक्षर भैंस बराबर है। फिर भी देखो कितना महंगा […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।