गियर बदलना पड़ता है

bipin bavara
जिंदगी एक सफर है,इसमें चलते रहना पड़ता है,
कभी धूप-कभी छांव, तो कभी बारिश में भी आगे बढ़ना रहता है।

आएंगे राहों में गड्ढे बड़े-से-बड़े,उनमें से कुछ को पार,
तो कुछ में से होकर ही निकलना पड़ता है।

अब…
माना कि आप नहीं हैं, पैदल चलने के शौक़ीन,
नहीं सुहाती भी आपको,धूप और बारिश रंगीन
तो आप होंगे अपने ख्वाबों की गाड़ी में बैठे बेहतरीन।

लेकिन हमें ज़रा एक बात ये बताएं…,
मेरी ऊपर कही इक बात पर ज़रा गौर फरमाएं
कि, रास्ते तो होंगे आपके लिए भी वही,
इनमें तो होंगे ज़रा भी बदलाव नहीं।

तो फ़िर…
आपकी इस गाड़ी को भी,
समय-समय पर गियर तो बदलना पड़ता है।

                                                                         #बिपिन पाल 
परिचय:बिपिन पाल का साहित्यिक उपनाम-बिपिन बावरा है। इनकी जन्मतिथि-१७ अप्रैल १९९७ और जन्मस्थान- जौनपुर है। वर्तमान में इलाहाबाद(उत्तर प्रदेश) में निवासरत हैं। डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजी.और बीएससी(प्रथम वर्ष)आपकी शिक्षा है। फिलहाल कार्यक्षेत्र-विद्यार्थी का है। स्वतन्त्र लेखन के अन्तर्गत पद्य और शायरी रचते हैं। ब्लॉग पर भी सक्रिय श्री पाल के लेखन का उद्देश्य- अपने आसपास होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं, क्रियाओं एवं प्रतिकियाओं के प्रति एक अलग नज़रिया महसूस करना तथा लेखनी द्वारा दूसरों तक भी पहुंचाना है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।