टूटे रिश्तों का गजब चित्रण ‘शेफ़’

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शुक्रवार कॊ प्रदर्शित हुई फिल्म ‘शेफ’ में
सैफ,पदम् प्रिया,धनिष कार्तिक,राम गोपाल बजाज और स्वर कामले सितारे हैं। इसके निर्देशक राजा कृष्ण मेनन हैं।
इस फ़िल्म की कहानी २०१४ में आई हॉलीवुड फिल्म ‘शेफ़’ की नकल है।
कहानी शुरू होती है रोशन कालरा (सैफ) से,जो अपने दिल से न सुनते हुए  नाक से सुनता है। अमेरिका के नामी रेस्टोरेंट में यह शेफ़ है, साथ ही वह घमंडी शेफ़ है। कोई उसके खाने की बुराई करे,तो वह नाक तोड़ देता है।
इसी के चलते उसे नौकरी गंवानी पड़ती है।
रोशन तलाकशुदा है,और उसकी बीवी- बच्चा चेन्नई में रहते हैं। उसके बच्चे से बातचीत का जरिया आधुनिक ‘स्काइप’ सुविधा है। बच्चा (स्वर कामले) लड़कपन में है और जवानी की दहलीज के करीब खड़ा है। वह परिवर्तनों को समझ रहा है,और पिता की कमी को भी,
इसी रिश्ते और एहसास का बहुत  संजीदगी और मानवीय चित्रण किया है निर्देशक राजा ने। जैसा काम उन्होंने ‘एयर लिफ्ट’ में दिखाय, वैसी ही उम्मीद पर खरे उतरे हैं इसमें भी। मां के किरदार में पदम प्रिया राष्ट्रीय पुरस्कृत होने के साथ भी सहज ही लगी है।
रोशन इंडिया आता है,बच्चे के साथ वक्त बिताता है। इसका स्क्रीन प्ले लाजवाब बनाया गया है, जिसका श्रेय रितेश शाह, राजा मेनन और सुरेश को जाता है।
ऐसे विषय पर मिलती-जुलती फिल्में बन ही रही है-मॉम,मातृ,भूमि, लेकिन इसका प्रस्तुतिकरण अलग होकर संजीदा है।
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फ़िल्म में कहीं भी आप विरक्त होकर रोने नहीं लगते हैं,लेकिन एहसासों के समुंदर में लगातार खुद को डूबा हुआ महसूस करते हैं।
बहुत धीरे से अपनों का,अपनों के साथ, अपनों के लिए एहसास आपके ज़हन में चलता रहता है।
फिल्म का अंत सोचा-समझा है,जिसके लिए फ़िल्म देखना पड़ेगी। लोकेशन्स खूबसूरत फिल्माई गई हैं।
एक गाना ‘शुगल लगा ले…’ भी अच्छा बना है,जो रघु दीक्षित ने गाया,बाकी संगीत औसत है।
सैफ ने पूरी ईमानदारी से किरदार को ठहराव और मुकम्मल तैयारी से फ़िल्म में परोसा है।
फ़िल्म को ३सितारे ही देंगे,क्योंकि यह सभी वर्गों के लिए नहीं है। एक खास वर्ग ही फ़िल्म को पसंद कर पाएगा।

                                                            #इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| इनका परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।