अनुशासन-बंधन या प्रबंधन

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pinki paturi
 अनुशासन बंधन नहीं है। प्रकृति भी अनुशासित है। देखो न, पृथ्वी और सारे ग्रह अपनी निश्चित परिधि में निश्चित गति पर सूर्य के चक्कर लगाते हैं। दिन रात, मौसम चक्र, सब इसी प्रबंधन का परिणाम है। पृथ्वी यदि कह दे , मैं तो बोर हो गई, या थक गई, एक ही काम करते-करते, तो क्या हो? पेड़ कह दे, मैं ही हमेशा फल क्यों देता रहूं, बादल कह दे कि मैं बारिश क्यों करुं ? और तो और घड़ी की सुइयां भी अनुशासित हैं और नियत गति से घूमकर हमें  सही समय दिखाती है।
 अनुशासन को बोझ न समझा जाए तो यह जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। वास्तव में अनुशासित व्यक्ति सामान्य व्यक्ति से बेहतर काम करता है और ज्यादा काम करता है। वह ज्यादा स्वस्थ रहता है और कार्यकुशल होता है।
 अब आप कहेंगे कि आजकल के बच्चों को अनुशासन सिखाना बहुत मुश्किल है तो याद रखिए ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। बच्चे वही करते हैं जो वो बड़ों को करते देख रहे हैं। यदि वे इंकार कर रहे हैं कहना मानने से,तो यकीनन आप सचेत हो जाएं। कहीं न कहीं आप ही सही नहीं हैं।
अनुशासन का पहला भाग है-आत्मानुशासन, यानी स्वयं का स्वयं पर शासन,जैसे समय की पाबंदी,खान-पान पर सचेत रहना,अपना सामान व्यवस्थित रखना,साफ-सफाई का ध्यान रखना, साफ-सुथरे और सुंदर कपड़े पहनना, नियमित व्यायाम करना आदि। दूसरे भाग में आता है कि आप अन्य लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं? जैसे बड़ों को सम्मान देना,छोटों को स्नेह,जरुरत पड़ने पर तन-मन-धन से मदद करना, कम बोलना,ज्यादा सुनना,विनम्रता और दया की भावना रखना तथा कार्यालय के काम समय पर पूरे करना आदि।
इस तरह एक अनुशासित व्यक्ति व्यवहारिक स्तर पर पसंद किया जाता है, बल्कि अपनी अनुशासन में रहने की आदत से वह स्वयं भी परेशान नहीं रहता है बल्कि उत्साहित रहता है।
अनुशासित व्यक्ति का आभामंडल बहुत उज्जवल और चुम्बकीय होता है।
अनुशासन में रहना एक-दो दिन की बात नहीं है। यह एक गुण है जो लगातार प्रयोग में लाने से एक आदत बन जाती है। फिर यह बंधन बिल्कुल नहीं लगता विपरीत, इसका स्वरूप प्रबंधन हो जाता है।

                                                      #पिंकी परुथी  ‘अनामिका’ 
परिचय: पिंकी परुथी ‘अनामिका’ राजस्थान राज्य के शहर बारां में रहती हैं। आपने उज्जैन से इलेक्ट्रिकल में बी.ई.की शिक्षा ली है। ४७ वर्षीय श्रीमति परुथी का जन्म स्थान उज्जैन ही है। गृहिणी हैं और गीत,गज़ल,भक्ति गीत सहित कविता,छंद,बाल कविता आदि लिखती हैं। आपकी रचनाएँ बारां और भोपाल  में अक्सर प्रकाशित होती रहती हैं। पिंकी परुथी ने १९९२ में विवाह के बाद दिल्ली में कुछ समय व्याख्याता के रुप में नौकरी भी की है। बचपन से ही कलात्मक रुचियां होने से कला,संगीत, नृत्य,नाटक तथा निबंध लेखन आदि स्पर्धाओं में भाग लेकर पुरस्कृत होती रही हैं। दोनों बच्चों के पढ़ाई के लिए बाहर जाने के बाद सालभर पहले एक मित्र के कहने पर लिखना शुरु किया था,जो जारी है। लगभग 100 से ज्यादा कविताएं लिखी हैं। आपकी रचनाओं में आध्यात्म,ईश्वर भक्ति,नारी शक्ति साहस,धनात्मक-दृष्टिकोण शामिल हैं। कभी-कभी आसपास के वातावरण, किसी की परेशानी,प्रकृति और त्योहारों को भी लेखनी से छूती हैं।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।