मनाओ या ना मनाओ… किसी ने कसम तो दी नहीं

0 0
Read Time5 Minute, 14 Second

 

शिशिर सोमानी

यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक / लेखकों का है, मातृभाषा.कॉम का नहीं।

अगले 2 दिनों में आपसे ये सवाल जरूर पूछे जाएंगे

 # 4 कीलों से ठोकें जाने पर ईसा को भगवान क्यों माने?

 # ईसा का भारत से क्या संबंध है …?

 # 25 दिसम्बर हम क्यों मनायें?

और  

# क्यों लगायें क्रिसमस ट्री … ?

 इनका जवाब एकदम रेडीमेड दे रहा हूँ

देखा जाए तो हर त्यौहार का अपना एक महत्व होता है और हर त्यौहार के साथ किसी ना किसी की भावनाएं जुड़ी रहती है। ख़ासकर हमारे देश में तो लगभग हर महीने कोई ना कोई त्यौहार मनाया ही जाता है। वैसे तो त्यौहार खुशियाँ मनाने के लिए होते है पर कुछ लोग त्योहारों पर भी राजनीति करने से पीछे नहीं हटते।

पहले के समय में जो बाज़ार लगते थे उसमें लोगों की जरुरत की चीज़े मिलती थी लेकिन समय के साथ बदलते माहौल और सोशल मीडिया के आने से अब त्योहारों का बाज़ार होने लगा है। किसी भी उत्सव के पहले सोशल मीडिया पर पाए जाने वाले कई ज्ञानियों के संदेश आना शुरू हो जाते है और कुछ ज्ञानी तो बिना पड़े भी संदेश को इधर से उधर पहुँचा देते है। अब आप देखना की आने वाली 25 दिसंबर क्रिसमस के पहले भी सोशल मीडिया पर पाए जाने वाले कई ज्ञानियों के संदेश आने लग जाएंगे और उन संदेशों में कई तर्कहीन प्रश्नों की झड़ी भी लग जाएगी। हालांकि इन प्रश्नों से कोई बड़ा या छोटा नहीं हो जाता है पर उन ज्ञानियों को कौन समझाए कि कोई भी त्यौहार ख़ुशी ख़ुशी मनाया जाए तो ही बेहतर है ना की उस को लेकर कुछ बयानवाजी करके विवाद खड़ा किया जाए।

मार्केटिंग रिसर्च टीमें कई कई वर्षों तक लोगों की भावनाओं को, रिश्तों की नजदीकियों – दूरियों, का बाज़ार में कैसे इस्तेमाल किया जाए इस पर काम करके फॉर्मूले गढ़ती हैं और कई लोग उस फार्मूलें में उलझकर रह जाते है। साधारण सी बात है कि आपको त्यौहार मनाना है मनाओ, ना मनाना है मत मनाओ पर कम से कम तर्कहीन बातें करके लोगों की भावनाओं पर चोट तो मत करों। कई लोगों को अंदाजा नहीं है कि उनके द्वारा किए गए तर्कहीन प्रश्नों का बाज़ार पर तो असर होगा ही साथ ही स्वयं पर भी नकारात्मक असर होगा। कोई भी त्यौहार हो वो खुशियाँ मनाने का एक अवसर होता है भले ही वो किसी भी धर्म का हो और जब खुशियाँ मनाने का कोई भी अवसर मिलें तो उसे क्यों गवाया जाएं। क्यों ना हम इस तरह की छोटी मानसिकता से ऊपर उठकर हर त्योहारों का उत्सव मिलकर मनाए।

सोशल मीडिया पर आने वाले कई तरह के नकारात्मक संदेशों से किसी को फ़र्क पड़ता है तो किसी को नहीं। हम आपस में विवाद करते रहे इसमें सबकी रूचि है। हमारे आपस के विवाद के कारण कुछ ग़लत लोगों को उसका आनंद भी आता है अब हमें समझना होगा कि हम उन ग़लत लोगों के आनंद के लिए विवाद करें या फिर अच्छे लोगों के लिए विवाद ना करें। लेकिन जब तक हम समझ पाते हैं, बहुत बेशकीमती वक़्त और रिश्ते दांव पर लग चुके होते हैं। अधिकतर रिश्ते बिगड़ने का कारण हमारे शब्द ही होते है, क्योंकि बोले गए या लिखें गए शब्दों की पहुँच दिल तक होती है और फिर जो घाव दिल पर होते है वे आसानी से भरते भी नहीं। हमें यह भी समझना होगा कि हमारे क्रियाकलापों और हमारे शब्दों से ही हमारी छवि बनती है इसलिए क्यों ना हम अच्छे शब्दों का ही सहारा लें।

 

लेखक परिचय :  शिशिर सोमानी अग्रणी जनसंपर्क संस्थान के प्रमुख कार्यकारी है। वे एक सम्प्रेषण प्रशिक्षक है, उद्यमिता के विचार और प्रचार – प्रसार का कार्य करने में सदैव तत्पर रहते है।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

गाँव में खबरों का कुँआ है

Fri Dec 16 , 2016
अर्पण जैन ‘अविचल’ ये उँची-लंबी, विशालकाय बहुमंज़िला इमारते, सरपट दौड़ती-भागती गाड़ीयाँ, सुंदरता का दुशाला औड़े चकमक सड़के, बेवजह तनाव से जकड़ी जिंदगी, चौपालों से ज़्यादा क्लबों की भर्ती, पान टपरी की बजाए मोबाइल से सनसनाती सभ्यता, धोती-कुर्ते पर शरमाती और जींस पर इठलाती जवानी, मनुष्यता को चिड़ाती व्यवहारशीलता, मेंल-ईमेंल में […]
arpan jain avichal

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।