
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को सिर्फ़ भारतवासी ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में जानती, मानती है। ऐसे भगवान श्री राम के जन्मोत्सव या यूं कहिए प्रकटोत्सव की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं, बधाई।
भारतीय संस्कृति का मूल सनातनी संस्कृति में है और यह आर्यवर्त यानी अखंड भारत, जो कि भारत की सीमाओं के पार लगभग 15 देशों तक फैला है, वहां की भी मूल संस्कृति सनातनी संस्कृति है
भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति है ,और हम पूरे ब्रह्मांड को ही अपना परिवार मानते है ।जिसमे चाँद , सूरज , सहित 9 ग्रहों की पूजा की भी हमारी संस्कृति में व्यवस्था रही है । दशावतार के माध्यम से हमने जल , जमीन , जंतु , सहित सभी जीवित एवं निर्जीव वस्तुओं में ईश्वर का वास देखा है । हमारी संस्कृति सिंधु से अपभ्रंस होकर हिन्दू संस्कृति बानी है । आज मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्मोत्सव है और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के इस देश में राजनीतिक रूप से सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा है। संचार के विभिन्न माध्यमों से हमें हमारे देश की राजनीतिक परिस्थिति का पता चलता है। आज सभी राजनीतिक दलों का मुख्य ध्येय सत्ता की मलाई खाना रह गया है या सत्ता प्राप्त करना रह गया है और होना भी चाहिए, क्योंकि दलगत राजनीति का अन्तरिम लक्ष्य सत्ता प्राप्ति ही है। लेकिन सत्ता प्राप्ति की इस लोलुपता में हम इस देश के और इस देश की संस्कृति के मापदंड भूल गए हैं। आज राजनीति और राजनेताओं का साध्य सिर्फ़ सत्ता रह गया है और इसे प्राप्त करने के लिए हमारी राजनीतिक व्यवस्था किस हद तक गिर चुकी, इसका प्रमाण वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य है।
कोई धर्म की दुहाई देकर तो कोई कोई लोकतंत्र की दुहाई देकर तो कोई धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देकर सत्ता प्राप्त करने की होड़ में लगा हुआ है।
और इस जंग को जीतने के लिए सभी संवैधानिक मानदंडों को धत्ता बात कर हर कुटिल चाल चली जा रही है। आज देश में कोई भी राजनीतिक दल ऐसा नहीं है जो सिद्धांतों की राजनीति करता हो, कोई राजनीतिक दल ऐसा नहीं है जो संवैधानिक दायरे में रहकर राजनीति करता हो। आज कोई ऐसा राजनीतिक दल नहीं है जो राष्ट्र की आराधना करता हो। आज सभी राजनीतिक दल कानून और संविधान की कसमें खाकर कानून और संविधान को धत्ता बता रहे हैं। जिस दल के पास सत्ता आयी उसने कानून और संविधान को अपने चश्मे से पढ़ा है। हर राजनीतिक दल ने सत्ता प्राप्त कर अपने विरोधियों को निपटाने का काम किया है। ऐसे में आज राजनीतिक व्यवस्था की जो दुर्गति हुई है, वैसी दुर्गति कभी नहीं हुई। आज राजनीति को धर्म का सहारा लेना पड़ रहा है सत्ता प्राप्त करने के लिए जबकि धर्म साधन नहीं साध्य होना चाहिए जबकि वर्तमान में धर्म को सत्ता की सीढ़ी चढ़ने का साधन बना दिया है।
आज संस्कृति बचने की बात कही जा रही है, किंतु क्या भारतीय या सनातनी संस्कृति कभी खतरे में रही है, तो इसका जवाब सिर्फ़ नहीं में होगा। क्योंकि भारतीय संस्कृति पर जब-जब हमला हुआ है, तब-तब वह और परिष्कृत होकर निखरी है। हज़ारों हज़ार साल से इस भारत भूमि पर कई आक्रांतओं ने हमले किये हैं, कई विदेशी संस्कृति के प्रहार हुए हैं, मुगलों और अंग्रेज़ों ने हज़ारों वर्ष इस देश पर राज किया है। और सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक हमले कर सनातनी संस्कृति को तहस-नहस करने का प्रयास हुआ है, किंतु फिर भी हमारी संस्कृति जस की तस है। फिर वर्तमान समय में हमारी संस्कृति को किस से खतरा है!
आज यदि खतरे में है तो जनमानस की भावना खतरे में है। आज यदि खतरे में है तो वसुधैव कुटुंबकम् की भावना खतरे में है, आज यदि खतरे में है तो मानवीय संवेदनाएं खतरे में हैं। आज यदि खतरे में है तो भगवान श्री राम की मर्यादा की भावना खतरे में है। आज यदि खतरे में है तो अनेकता में एकता की संस्कृति खतरे में है।
आइये, आज हम भगवान श्री राम से प्रार्थना करें कि हमारे देश में इन सत्तालोलुप राजनीतिज्ञों को सद्बुद्धि दें, और देश को राजनीति से नहीं नीति से चलाने की प्रेरणा दें। राज तो समय के साथ परिवर्तित होते रहेंगे लेकिन भारत की सनातनी संस्कृति को जीवित रखना है तो नीति पर चलना होगा।
हमारी सनातनी संस्कृति में विश्व की सभी संस्कृतियों के दर्शन होते हैं।
हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम् की संस्कृति है, जिसमे विरोधियों को भी साथ रखने की प्रेरणा है, जिसमें सम्पूर्ण मानवलोक को एक परिवार मन है।
गोपाल सोनी
कुक्षी, जिला धार (म.प्र.)
परिचय:
पिताजी: श्री कालूरामजी सोनी
शिक्षा: विषय मे स्नातकोत्तर हिन्दी, राजनीति, समाज शास्त्र
पता: सोनी मोहल्ला कुक्षी, जिला धार, मध्य प्रदेश
मोबाइल: 9893741611