राजधानी दिल्ली में रविवार को लघुकथा मन्थन का आयोजन

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लघुकथा पर गंभीर विमर्श के साथ लघुकथाकार होंगे सम्मानित

दिल्ली। हिन्दी साहित्य की महनीय विधा है लघुकथा और इस विधा पर विमर्श स्थापित करने के उद्देश्य से मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा रविवार को राजधानी दिल्ली के आईटीओ रोड स्थित हिन्दी भवन में सायं 4 बजे से लघुकथा मन्थन आयोजित किया जा रहा है। मन्थन चार सत्रों में सम्पन्न होगा, जिसमें विमर्श, सम्मान, लघुकथा पाठ एवं विमोचन होगा। मन्थन के मुख्य प्रायोजक इंटीग्रल प्रोजेक्ट्स है।

आयोजक संस्थान की राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य भावना शर्मा ने बताया कि ‘दिल्ली लघुकथा का गढ़ रहा है, इसी दृष्टि से लघुकथा का मन्थन इन्दौर के बाद अब दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। आयोजन के प्रथम सत्र में ‘संभावनाओं के आलोक में लघुकथा’ विषय पर ख़्यात लघुकथाकार बलराम अग्रवाल, सुभाष नीरव, संदीप तोमर का वक्तव्य सहित इंटिग्रेल प्रोजेक्ट्स के निदेशक आलोक त्यागी औऱ डी के शर्मा का आतिथ्य रहेगा। मन्थन में चयनित लघुकथाकार अपनी लघुकथा का पाठ करेंगे। मन्थन में विमोचन एवं प्रतिभागियों का सम्मान भी किया जाएगा।’
संस्थान के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष गिरीश चावला ने बताया कि ‘आयोजन में चयन मण्डल द्वारा चयनित अठारह लघुकथाकार सरिता गुप्ता, शोभना श्याम, प्रणीता प्रभात, तरूणा पुंडीर, मनोज कुमार कर्ण, पुनीता सिंह, सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा, अंजू खरबंदा, विनय कुमार मिश्रा, अंजू निगम, सुशील शैली, निशा भास्कर, कामना मिश्रा, बालकीर्ति, सविता चड्डा, गौरव सुनील कुमार व दिव्या सक्सेना अपनी स्वरचित लघुकथा का पाठ करेंगे।’

लघुकथा जैसी विधा पर एक विमर्श और मन्थन की दरकार रही है, उसी तारतम्य में यह महनीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसके साथ संस्थान इस विमर्श को स्थापित कर लघुकथा विधा एवं हिन्दी के प्रचार के लिए एक सकारात्मक हल प्रदान करेगा, जो निकट भविष्य में साहित्य व लघुकथा की दृष्टि से कारगार होगा। यह आयोजन खुला एवं निःशुल्क है, बतौर श्रोता सभी आमंत्रित हैं।

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अपना कौन?

Sat Nov 12 , 2022
मैं जहाँ रास्ता भटका वहां मार्ग संकेतक नहीं थे सोचा अपने हैं लेकिन यह पता नहीं था अपनों की परिभाषा अब बदल गई है अब तो अपना मतलब सपना है अर्देन्दु भूषण इन्दौर, मध्यप्रदेश लेखक वर्तमान में दैनिक प्रजातंन्त्र के सम्पादक और स्तम्भकार है। Post Views: 44

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।