जनसंख्या

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बढ़ेगी जब जनसंख्या, अच्छे दिन कैसे आयेंगे।
होगे जब दस दस बच्चे,फिर बुरे दिन तो आयेंगे।।

बढ़ रही जनसंख्या कैसे नियंत्रण कर पाओगे।
हुआ न नियंत्रण,देश का विकास न कर पाओगे।।

पड़ी है बेड़ियां जनसंख्या की भारत मां के पैरो में।
चलता रहा देश ऐसा,रोड़ी चुभेगी मां के पैरो मे।।

बढ़ेगी जनसंख्या देश की,ये विकास रुक जाएगा।
रोकी नहीं आबादी,देश गड्ढे मे तुरंत गिर जाएगा।।

बच्चे ज्यादा होगे तो जरुरते कैसे होगी पूरी।
कम बच्चो वालो की भी जरुरते न होती पूरी।।

बहती थी जहां दूध की नदिया पानी के लिए तरस रहा है।
एक बोतल शुद्ध पानी के लिए बन्दा अब तरस रहा है।।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।