एक कविता

0 0
Read Time1 Minute, 38 Second
ram-300x208
धीरे-धीरे
जीवन बीता।
आज तक
नहीं लिख पाया
एक कविता।।
कविता जो
व्याप्त हो जाए,
संसार में
समा जाए
मानव की रग-रग में
हर समय
जिसके शब्द
कानों में गूँजे
छा जाए
हर किसी के
मनोमस्तिष्क में।
हृदय को टटोले
हाथ उठे
उसके आदेश से
पैर चले
उसकी राह,
पेट हो जाए परिपूर्ण
उसको पढ़ने से।
मर जाए भूख
बुझे चूल्हे जला दे
इतनी आग हो उसमें
या लगी हो कहीं आग
अपनी शीतलता से
उसे शांत कर दे।
जगा दे
निराश में नई आशा,
विद्रोहियों को
पढ़ा दे
प्रेम की परिभाषा..
बात करे जो
ज़मीन की
ना चाँद-तारों की
सहारा बने जो
बेसहारों की
पहाड़ों-सी ऊँचाई
सागर-सी गहराई
पेड़ों की छाँव हो
शहरों-सी तेजी हो
सरलता जैसे गाँव हो।
पढ़े उसे
पृथ्वी का जन-जन
जिसे पढ़कर
आत्मा हो जाए प्रसन्न
पृथ्वी का हर मानव
पाए उसमें
गुरुग्रँथ-बाईबिल
कुरान या गीता।
आज तक
नहीं लिख पाया
एक कविता।।

                                                                       #रामशर्मा ‘परिन्दा’

परिचय : रामेश्वर शर्मा (रामशर्मा ‘परिन्दा’)का परिचय यही है कि,मूल रुप से शासकीय सेवा में सहायक अध्यापक हैं,यानी बच्चों का भविष्य बनाते हैं। आप योगाश्रम ग्राम करोली मनावर (धार, म.प्र.) में रहते हैं। 

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

आज कहूं अंतर की बात..

Sat Jun 3 , 2017
आज कहूँ अंतर की बात, गुजरा जीवन गहरी रात। धीर छूटता नीर बरसता, चुप ज्यूँ भोर की उजास चुभते भूले से व्याघात, आज कहूं अंतर की बात। नीरस वाणी सूखी आशा, गहरे छुपी प्रेम पिपासा अपनों से मिले आघात, आज कहूं अंतर की बात। साथी जीवन बीता आधा, बिन जाने […]

पसंदीदा साहित्य

नया नया

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।