विश्वकप के दोहे ..

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पहला मेच पाक से, कोहलि बने विराट ।
धोनी मोहित छा गये, शिखर धवन सम्राट । ।
अफ्रिका भी हार गया, भारत मारे तीर ।
शिखर सैंकड़ा मारके, बने टीम के पीर।।
संयुक्त अमीरांत मे, रोहित बने महान ।
नौ विकेट से जीतके,शमी देश की शान।।
चौथा वेस्टइण्डीज से, जीते चार विकेट।
धन धन बेटा आपको, बल्ले से आखेट ।।
आयरलैंड आठ से, भारत से थी हार।
शिखरधवन की शतकसे, आया रंग बहार ।।
सुरेश रैना सैकड़ा, जिम्बाबे की हार ।
छै विकेट से जीत भइ, जाने सब संसार ।।
तर्रासी धोनी बना, सिक्सर से ली जीत।
छठी जीत की शान मे,जनता करती प्रीत ।।
रोहित रैना साथ में,करते रन बौछार ।
धोनी की चतुराइ से, बंगला भया किनार।।
बंगला टूट नीचे गिरा,मेलबोर्न मैदान ।
धोनी सेना झूमती, बालर राखे मान।।
सात मेच सत्तर गिरे, सातों जीते आप।
चक्र व्यूह को तोड़के, बाल बेट से टॉप।।
आठम आस्ट्रेलिया, जोड़ा रनन पहार।
धोनी पैसठ पे गये. बाकी सब बेकार।।
नैनो से नैना मिले, नैना हटती गेंद।
कमजोरी को भॉपके, मारी दुश्मन सेंध ।।
विराट घायल हो गये, रैना होते केच।
धोनी साक्षी से कहें, कैसे जीतें मेच।।
कंगारु किवी से भिड़े,फाईनल में साथ।
विश्वकपा को जीतके, लड्डू खाते हाथ। 14

डॉ.दशरथ मसानिया,
आगर मालवा म.प्र.

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।