विश्व चिंतन दिवस

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आओ बैठें कुछ पल,
और चिंतन करें।
क्या सही, क्या गलत,
इसका मंथन करें

किया जिसने चिंतन,
वो ही ज्ञानी हुआ।
रस, रसायन का वो,
सदा विज्ञानी हुआ।

ऋषियों मुनियों ने भी ,
सदा चिंतन किया।
रामायण और गीता में,
जीवन का सार दिया।

निखरता है व्यक्तित्व,
सिर्फ चिंतन से।
मन मष्तिस्क हो शुद्ध,
सिर्फ चिंतन से।

काल विकसित हुए,
बस चिंतन से सदा।
ना करते चिंतन तो,
पिछड़े रहते सदा।

शुभ चिंतन है रखता,
हमें निरोगी सदा।
नित चिंतन बनाये,
हमें योगी सदा।

मनन करके प्रभु का,
करो चिंतन सदा।
ख़ुद के संग संग सोचो,
दूसरों का भला।

बिन चिंतन मनन के,
जो काज करे।
खामियाजा बुरा वो,
सदा ही भरे।

करो चिंतन मनन बस,
ना चिन्ता करो।
दुर्व्यसनों से सदा ही,
तुम बच के रहो।

चिन्ता चिता है ये,
तुम जान लो।
बात मेरी बस इतनी,
तुम मान लो।

हो चिंतन शुभ बस,
शर्त यही है मेरी।
खुश रहोगे सदा तुम,
दुआ है ये मेरी।

स्वरचित
सपना (स. अ.)
जनपद-औरैया

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।