जब तक

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दुनियां वालों की नजरों में ,
हम तब तक अच्छे रहते हैं।
लगा के ताला जुबां पर अपनी,
हम जब तक मौन रहते हैं।

 मर मर कर जीते हैं जब तक,
 तब तक सब खुश रहते हैं।
 अपने भी आंख दिखाते हैं ,
 जब अपने लिए हम जीते हैं।

जिनकी हां में हां मिलाते,
हम उनके दिल में रहते हैं।
अपने दिल की जुबां पे लाते,
तो वाचाल हमें सब कहते हैं।

    सेवा खुशामद करते सबकी ,
    हमें कार्यकुशल सब कहते हैं।
    अपने लिए कुछ कर बैठे तो,
    मक्कार  हमें सब कहते हैं।

रूखी सूखी खाते तब तक,
समझदार सब कहते हैं।
अपनी खुशी से खर्च करें तो,
सब नासमझ हमें कहते हैं।

       जब तक रहते साड़ी घूंघट में,
       हमें संस्कारी सब कहते हैं।
       शान से थोड़ा निकलें जो,
       सबकी नजरों में खलते हैं।

मार पीट अपशब्द सहें तो,
सबके मन के रहते हैं।
आवाज उठाते जब हिंसा की,
सब बेहया हमें कहते हैं।

        मन्द मन्द मुस्काए तो,
        हम सबको अच्छे लगते हैं ।
        खुल हंस लें जरा कभी तो,
        निर्लज्ज हमें सब कहते है।

जब सिर को झुका कर चलते हैं ,
हम सबको अच्छे लगते हैं।
महफ़िल में जो ठुमके लगा दें,
तो बेशर्म हमको कहते हैं।

रचना
सपना (स० अ०)
जनपद – औरैया

matruadmin

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Sat Oct 10 , 2020
जिंदगी में बहुत लोगों के तुम काम आये हो। मर कर भी साथ तुम लोगो का निभा जाओ। अपने अंगों को तुम औरों को दान कर जाओ। और जाते जाते खुद ही अंतिम उपकार कर जाओ।। देकर जीवन दूसरों को मानव धर्म निभा जाओ। जिओ और दूसरों को जीने की […]

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।