जब तक

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दुनियां वालों की नजरों में ,
हम तब तक अच्छे रहते हैं।
लगा के ताला जुबां पर अपनी,
हम जब तक मौन रहते हैं।

 मर मर कर जीते हैं जब तक,
 तब तक सब खुश रहते हैं।
 अपने भी आंख दिखाते हैं ,
 जब अपने लिए हम जीते हैं।

जिनकी हां में हां मिलाते,
हम उनके दिल में रहते हैं।
अपने दिल की जुबां पे लाते,
तो वाचाल हमें सब कहते हैं।

    सेवा खुशामद करते सबकी ,
    हमें कार्यकुशल सब कहते हैं।
    अपने लिए कुछ कर बैठे तो,
    मक्कार  हमें सब कहते हैं।

रूखी सूखी खाते तब तक,
समझदार सब कहते हैं।
अपनी खुशी से खर्च करें तो,
सब नासमझ हमें कहते हैं।

       जब तक रहते साड़ी घूंघट में,
       हमें संस्कारी सब कहते हैं।
       शान से थोड़ा निकलें जो,
       सबकी नजरों में खलते हैं।

मार पीट अपशब्द सहें तो,
सबके मन के रहते हैं।
आवाज उठाते जब हिंसा की,
सब बेहया हमें कहते हैं।

        मन्द मन्द मुस्काए तो,
        हम सबको अच्छे लगते हैं ।
        खुल हंस लें जरा कभी तो,
        निर्लज्ज हमें सब कहते है।

जब सिर को झुका कर चलते हैं ,
हम सबको अच्छे लगते हैं।
महफ़िल में जो ठुमके लगा दें,
तो बेशर्म हमको कहते हैं।

रचना
सपना (स० अ०)
जनपद – औरैया

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matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।