गांधी और शास्त्री की जयंती पर निकाली प्रभात फेरी।

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हिसार-अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी एवं जवान और किसान के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर गांधी अध्ययन केंद्र सर्वोदय भवन ने आज प्रातः सर्वोदय भवन संचालक धर्मवीर शर्मा की अगुवाई में प्रभात फेरी निकाली प्रभात फेरी प्रातः 5:30 सर्वोदय भवन से शुरू होकर नागोरी गेट खजानचियान बाजार होते हुए गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हुए भगत सिंह चौक पर शहीदे आजम भगत सिंह को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए बाल्मिकी चौक डोगरान मोहल्ला से होते हुए पंडित लाल बहादुर शास्त्री चौक पर जाकर उनकी प्रतिमा को माल्यार्पण कर सर्वोदय भवन में आकर सभा का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ता के रूप में दयानंद महाविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर महेंद्र सिंह रोहिल्ला “विवेक” ने अपने विचार रखे। प्रोफेसर रोहिल्ला के अनुसार दोनों ही महान हस्तियां सादगी के प्रतीक थे। जिन्होंने कभी दिखावा नहीं किया पंडित लाल बहादुर शास्त्री ने जब प्रधानमंत्री पद की शपथ ली उस वक्त उनकी धोती तक फटी हुई थी।
नमक सत्याग्रह के समय गांधी जी को पुलिस ने गिरफ्तार किया और यरवदा जेल में रखा गया, जब उनसे उनका व्यवसाय पूछा तो उन्होंने अपना व्यवसाय बुनकर बताया अमूमन गांधी जी से जब कोई व्यवसाय पूछता था, तो वह अपना व्यवसाय बुनकर बताते थे। क्योंकि वह चरखा खाते थे यह सर्वविदित भी है। जेल के दौरान उन्होंने जेल अधिकारियों से कहा कि मुझे जो मैं अपने हाथ से कुछ बना सकूं, ऐसा बनाने के सामान की व्यवस्था कर दीजिए इस पर जेल अधिकारियों ने मोची का सामान चमड़ा और उसके बनाने के औजार दिए। गांधीजी ने वहां पर चप्पल बनाई उस वक्त वायसराय इरविन जेल के मुवायना करने आए तो उन्होंने गांधीजी की बैरक के पास आकर रुके। गांधीजी ने उन्हें कहा कि मिस्टर इरविन आप मेरे द्वार पर आए हैं, तो हमारी संस्कृति के अनुसार यदि कोई मेहमान द्वार पर आता है तो उसे उपहार दिया जाता है, मैं यह मेरे द्वारा निर्मित चप्पल आप को उपहार स्वरूप देता हूं। इरविन जब अपने देश इंग्लैंड जाने लगे उन्हीं दिनों हवाई जहाज का चलन शुरू हुआ था। जहाज में बहुत कम सामान लेकर जा सकते थे। वह अपना केवल एक सूटकेस लेकर जा सकते थे इसलिए बाकी सारा सामान उनका वही रखवा दिया गया सूटकेस में केवल गांधी जी द्वारा दी गई चप्पल ले जाने की इजाजत दी गई। जब उन्होंने पूछा कि आप यह चप्पल ही क्यों लेकर जाना चाहते हैं, तो उनका जवाब था, कि मेरे सबसे बड़े शत्रु द्वारा दिया गया यह उपहार जो मुझे हमेशा याद दिलाता रहेगा। उन्होंने अपने घर जाकर उसे मेज पर सजा कर रखा उनकी मृत्यु के बाद इंग्लैंड के नेशनल म्यूजियम के प्रवेश द्वार पर उन चप्पलों को रखा गया है।ऐसी महान हस्ती को आज नमन करते हुए गांधी अध्ययन केंद्र सर्वोदय भवन अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
इस अवसर पर संचालक धर्मवीर शर्मा जगदीश श्योराण,मास्टर प्रवीण,कृष्ण कुमार सत्यपाल शर्मा, बनवारी लाल,प्रमोद कुमार,वेद प्रकाश, खादी आश्रम के सेक्रेटरी हुकम सिंह एवं साहित्यकार शुभकरण गौड़ मौजूद थे।

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।