जिस देश में हमने जन्म लिया

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जिस देश में हमने जन्म लिया,
उस देश पर बलिदान हो जाए।
जो है निर्बल असहाय गरीब,
उनको तारे हम खुद तर जाए।।

निज आन मान मर्यादा का,
प्रभु ध्यान रहे अभिमान रहे।
अपने भारत के साथ साथ
सारे विश्व का कल्याण करे।।

जो हमें धमकाए उसे हम धमकाए
उसके सीने पर हम वार करे,
जो गोली चलाए छिप छिप कर,
उस पर तोपो से हम वार करे।।

जो आंखे दिखाए हमको अपनी
उसकी आंखे निकाल बाहर करे।
जो छिप छिप कर हमला करे,
उसके हमले को हम नाकाम करे।।

हम शान्ति के सदा है पुजारी,
पर उसका मतलब ये तो नहीं
जो करे हम पर आक्रमण,
उसका ज़बाब दे न हम नहीं

ये है वीर शिवाजी का भारत,
यहां गांधी सुभाष ने जन्म लिया।
विदेशी मुगलों व अंग्रेजो को ही,
हमने ही भारत से बाहर किया।।

ये शक्तिशाली है देश मेरा अपना
पर करते किसी का अपमान नहीं।
जो करते है मेरे देश का अपमान,
उनका यहां रहने का कोई स्थान नहीं।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।