किसानों को सशक्त करेगा यह बिल

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कृषि बिल पास होना किसानों के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है ।कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 और कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 को ध्वनि मत से पारित किया गया।
इसे किसानों के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है जबकि MSP जारी रहेगी। सरकारी खरीद जारी रहेगी। सरकार किसानों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रही है। विशेषज्ञों की नजर में यह न केवल कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन लाएगा, बल्कि इससे करोड़ों किसान सशक्त होंगे।

विधेयक के द्वारा सरकार ने कृषि पैदावार को किसानों को किसी भी राज्य में बेचने और मार्केटिंग करने का अधिकार दे दिया है. पहले किसान अपने राज्य की APMC मंडियों में ही इसे बेच पाते थे लेकिन अब एक विस्तृत बाजार होगा और मूल्य का विकल्प ! इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलेगा और कृषि उत्पादों की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग हो पाएगी।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खतरा की सारी आशंकाओ पर उस समय विराम लग गया जब पैदा कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इन अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि एमएसपी पहले की तरह ही जारी रहेगा जबकि दूसरे स्थान पर बढ़े हुए सामान के दाम का फायदा किसान वहां अपना सामान बेचकर उठा सकेगे। बिल किसानों के हित में है और इससे उनको ज्यादा फायदा कमाने का मौका मिलेगा।

किसानों को उनकी फसलों का लागत से ज्यादा मूल्य मिलने की गारंटी हो इसके लिए सरकार देशभर में अनाज, तिलहन, दलहन आदि की प्रमुख फसलों के लिए एक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है।खरीदार नहीं मिलने पर सरकार अपने खरीद केंद्रों के माध्यम से MSP पर किसान से फसल खरीद लेती है।
आशुतोष
पटना बिहार

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।