प्रार्थना

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कोरोना के अवसान को
प्रार्थना करो भगवान को
पाप धरा पर रहने न पाए
प्रेम दिलो से जाने न पाए
सदभावना की रसधार बहे
पवित्र मन और तन हो जाए
खुशियो भरा जीवन हो
सुगन्ध भरा हर उपवन हो
धर्म-जाति में भेद न हो
परिवार मे विच्छेद न हो
माता पिता को सम्मान मिले
कृष्ण सुदामा से मित्र मिले।
#श्रीगोपाल नारसन

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तेरे मन मन्दिर में जगह बनाऊं मै कैसे

Sun Sep 13 , 2020
तेरे मन मन्दिर में जगह बनाऊं मै कैसे, बिन बाती तेल के दीप जलाऊं मै कैसे। तड़फ तड़फ कर मर जाऊंगी मै बिन तेरे, पास नहीं तुम मेरे,अपना दर्द सुनाऊं मैं कैसे। बढ़ती नहीं है आगे जिंदगी अब बिन तेरे, बीते हुए लम्हों को अब भुलाऊ मै कैसे।। आती नहीं […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।