भारत माँ के लाल

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मिलें अपनो का प्यार हमको,
तो सफलता चूमेंगी कदम।
रहे सभी का अगर साथ,
तो जीत जाएंगे हर जंग।
और मिल जाएगा हमको,
खोया हुआ आत्म सम्मान।
इसलिए हिल मिलकर,
रहो देशवासियो सब।।

तुम्हें कसम भारत मां की,
दिखाओ अपना जौहर तुम।।
तुम्ही तो कणधार हो,
अब भारत माँ के बच्चों।
इसलिए में कहती हूँ ,
बहुत छला हैं गद्दारों ने।
तुम्हें अपनी माँ की रक्षा,
करने उतर जाओ मैदान में।।

बात जब माँ की आती हैं,
तो भूल जाते जाती धर्म।
और कस के कमर अपनी,
कूद जाते रणभूमि में हम।
और दिखा देते बहादुरी,
अपनी उन गद्दारो को।
तभी तो छोड़कर भाग जाते,
वो जंग के मैदान से।।

उन सभी वीर बहादुर सैनानियों को सलाम करते है जिन्होंने हमे आज़ादी दिलाई और अपने प्राण भारत माँ पर निछावर कर दिए।।
जय हिंद जय भारत

जय जिनेन्द्र देव
संजय जैन (मुम्बई)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।