दूर हो गये

Read Time0Seconds

कैसा ये दौर आ गया है,
जिसमें कुछ नहीं रहा है।
और जिंदगी का सफर,
अब खत्म हो रहा है।
क्योंकि इंसानों में अब,
दूरियाँ जो बढ़ रही है।
जिससे संगठित समाज,
अब बिखर रहा है।।

इंसानों की इंसानियत,
अब मरती जा रही है।
क्योंकि इन्सान एकाकी,
जो होता जा रहा है।
सुखदुख में वह शामिल,
अब नही हो पा रहा है।
और अन्दर ही अंदर,
घुटकता जा रहा है।।

मिलते जुलते थे जहाँ,
रोज इंसान अपास में।
वो मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे,
अब बंद हो गये है।
मानो भगवान भी अब,
इंसानों से रूठ गये।
और उनकी करनी का
फल इन्हें दे रहे है।।

साफ पाक स्थान भी,
पवित्र नहीं बची है।
जिससे पाप बढ़ गए है,
और परिणाम सामने है।
क्यों दौलत की चाह में,
इंसान इतना गिर रहा है।
जिसके कारण ही उसे,
भगवान ने दूर कर दिया।।

जय जिनेन्द्र देव की
संजय जैन (मुम्बई)

0 0

matruadmin

Next Post

बड़े अज़ीब दिन हैं ये और बड़े अजीब हैं ये अहसास...

Wed Jul 15 , 2020
हर दिन मानो एक नया इम्तहान लेकर सामने आता है और दिलोदिमाग पर उदासी की एक नई लकीर खींचकर चला जाता है…इस जद्दोजहद से बाहर निकलने की कोशिश भी कामयाब नहीं होती…भीतर का अंधेरा बाहर के अंधेरे के साथ सांठगांठ कर लेता है…देखिये क्या आलम है…कहीं बिजली कहर बरपा रही […]

You May Like

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।