वाह रे , कोरोना ! ……

0 0
Read Time3 Minute, 1 Second

वाह रे , कोरोना ! तूने तो गजब कर डाला ,
छोटी सोच और अहंकार को ,
तूने चूर-चूर कर डाला ।।
वाह रे , कोरोना ! ……

पैसो से खरीदने चले थे दुनिया ,
ऐसे नामचीन पड़े है होम आईसोलोशन में ,
तूने तो पैसो को भी , धूल-धूल कर डाला ।।
वाह रे , कोरोना ! ……

धुँ-धुँ कर चलते दिन रात साधन ,
लोगों की चलती भागमभाग वाली जिंदगी ,
तूने एक झटके में सारा जहां , सुनसान कर डाला ।।
वाह रे , कोरोना ! ……

दिहाड़ी करने वाले मजदूर ,
खेत पर काम करते गरीब किसान ,
तूने तो इनको बिल्कुल , कंगाल कर डाला ।।
वाह रे , कोरोना ! ……

अमीरी मौज कर रही बंद कमरों में ,
गरीबों को अपने घर आने के खातिर ,
कोसों पैदल चलने को , मजबूर कर डाला ।।
वाह रे , कोरोना ! ……

लोग कहते थे सौ-सौ रुपये लेती है पुलिस ,
देखो ! सुने चौराहों पर खड़ी हमारी सुरक्षा खातिर ,
हम सब लोगों का , विचार बदल डाला ।।
वाह रे , कोरोना ! ……

डॉक्टर को कहते थे तुम लुटेरे ,
आज फिर इस वैश्विक महामारी में ,
धरती का भगवान है डॉक्टर , ये साबित कर डाला ।।
वाह रे , कोरोना ! ……

सफाई कर्मियों को नीचता से देखते हो ,
देखो ! आज कैसे सेनिटराईज कर रहे भारत को ,
इन्ही लोगों ने भारत का , हाल बदल डाला ।।
वाह रे , कोरोना ! ……

शिक्षक तो होते ही है सबसे न्यारे ,
आज दिन रात लगे है हम सबको बचाने ,
हमारे दिल में और सम्मान बढ़ा डाला ।।
वाह रे , कोरोना ! ……

कोरोना से दिन रात लड़ रही सरकार ,
राजनीति को ताक में रख लॉकडाउन से ,
इस कोरोना महामारी पर शिकंजा कस डाला ।
वाह रे , कोरोना ! …..

सिर्फ जनता हित के लिए ही तो खड़े है तत्पर ,
पुलिस , डॉक्टर , सफाईकर्मी , शिक्षक और प्रशासन ,
इन पांचों ने तो अपना सब सर्वस्व दे डाला ।।
वाह रे , कोरोना ! ……

कोरोना हारेगा हमारी एकता से ” जसवंत ” ,
फिर देखना दुनिया देखेगी , कैसे भारत देश ने ,
कोरोना महामारी का सत्यानाश कर डाला ।।
वाह रे , कोरोना ! ……

नाम – जसवंत लाल बोलीवाल ( खटीक )

पिताजी का नाम – श्री लालूराम जी खटीक ( व.अ.)

माता जी का नाम – श्रीमती मांगी देवी

धर्मपत्नी – पूजा कुमारी खटीक ( अध्यापिका )

शिक्षा – B.tech in Computer Science

व्यवसाय – मातेश्वरी किराणा स्टोर , रतना का गुड़ा

राजसमन्द ( राज .)

matruadmin

Next Post

कृपया दूरी वाले घेरे में टंगे रहें ..

Fri Apr 10 , 2020
भारत प्राचीन काल से ही सोशल डिस्टेंसिंग प्रधान देश रहा है। जिसके माहात्म्य पर वेदों ,शास्त्रों में विस्तार से प्रकाश डाला गया है। हमारा ख्याल है कि कालान्तर में कोरोना वायरस के कारण ही ऐसी अवधारणा का जन्म धर्म शास़्त्रों में हुआ होगा। जिससे ऐसी सामाजिक दशा पनपी होगी। इसे […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।