हमारे हालात

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आप यकीन नहीं करेंगे | दुनियां के कुछ अन्य देशों का कुल बज़ट होता है, उतना खर्च तो भारत के नेता लोगों के समोसों के लिए निकलता है | फिर इस देश के आम जनमानस चाहें भूखा मरे, नंगा रहे, कोई फर्क नहीं पड़ता | आप आश्चर्य करेंगे, जितने लोग किसी छोटे-मोटे युद्ध में मरते हैं, उतने तो हमारे किसान आत्महत्या कर लेते हैं | हमारे यहाँ युवाशक्ति निठ्ठली घूम रही है और बूढ़े खूसट मंत्री जो ठीक से सांस भी नहीं ले पा रहे वे कोई रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, शिक्षा मंत्री बने बिस्तर पर पड़े-पड़े खांस रहे हैं |

हमें कोई देशभक्ति, स्वदेशी की शिक्षा कतई न दे | हम स्वदेशी व देशभक्ति के नाम पर गोबर जैसी चीज भी सोने जैसी मंहगी धातु की कीमत में खरीद लेते हैं | उदाहरण के तौर पर रामदेव के उत्पाद | दुनिया में किसानों को सबसे ज्यादा सब्सिडी देने वाला देश अमरीका है और किसानों का सबसे ज्यादा तेल निकालने वाला देश हमारा अपना भारत है |

जिस तरह स्वर्ग सब जाना चाहते हैं पर मरना कोई नहीं चाहता, उसी तरह भ्रष्टाचार से सब पीडित हैं पर भ्रष्टाचार सब कर रहे हैं | जिसकी जैसी औकात उसी के अनुसार | अभी हाल ही में मैं फतेहाबाद तहसील कोर्ट में किसी काम से गया था | वहाँ कोर्ट का एक कर्मचारी लोगों से मांग-मांगकर चाय पीता, गुटखा खाता, सिगरेट पीता मैंने देखा | उसके बारे में पता लगाया तो मालुम पड़ा महाशय को पचास-साठ हजार प्रतिमाह मिलते हैं और ऊपरी कमाई सहित एक लाख से ऊपर महीना निकल जाता है | उसकी कमाई सुनकर मेरा पसीना छूट गया | लेकिन उसकी भेष-भूसा, रहन-सहन देखकर आप अनुमान नहीं लगा सकते कि यह हमारे देश का छोटा अम्बानी है |

इस देश की सरकारों से आम जनमानस की भलाई वाली नितियों के बारे में कार्य हमेशा कछुए वाली चाल में होता है | कमाल की बात यह है कि अभी हाल ही में बेमौसम बारिश और आंधी ओलों से काफी फसलें नष्ट हो गईं, तो किसानों के मुआवजे का ऐलान किया गया | अफवाह फैली कि फैलाई गई, जिन्होंने बैंकों से ऋण लिया है वे ही किसान हैं बाकी तो मुकेश अम्बानी के फूफा हैं | हालांकि बाद में सुधार कर लिया गया था | परन्तु इस अफवाह की वजह से बहुत से छोटे किसान सरकार से मुआवजा लेने से चूक गये |

कुलमिलाकर हम आज जिन हालातों में जी रहे हैं, उन हालातों के जिम्मेवार हम स्वयं ही हैं |

#मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

परिचय : मुकेश कुमार ऋषि वर्मा का जन्म-५ अगस्त १९९३ को हुआ हैl आपकी शिक्षा-एम.ए. हैl आपका निवास उत्तर प्रदेश के गाँव रिहावली (डाक तारौली गुर्जर-फतेहाबाद)में हैl प्रकाशन में `आजादी को खोना ना` और `संघर्ष पथ`(काव्य संग्रह) हैंl लेखन,अभिनय, पत्रकारिता तथा चित्रकारी में आपकी बहुत रूचि हैl आप सदस्य और पदाधिकारी के रूप में मीडिया सहित कई महासंघ और दल तथा साहित्य की स्थानीय अकादमी से भी जुड़े हुए हैं तो मुंबई में फिल्मस एण्ड टेलीविजन संस्थान में साझेदार भी हैंl ऐसे ही ऋषि वैदिक साहित्य पुस्तकालय का संचालन भी करते हैंl आपकी आजीविका का साधन कृषि और अन्य हैl

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।