क्यों अपनों से नजर चुराते हो

Read Time0Seconds

ऐसा क्या अपराध किया जो..
अपनों से नजर चुराते हो..
चोर अगर है दिल में तो फिर..
क्यूँ बड़ा हृदय दिखलाते हो..
प्रजातंत्र में केवल और केवल
पाना ही स्वीकार नहीं..
प्रजा अगर जो साथ नहीं तो..
राजा को गद्दी का अधिकार नहीं..
युद्ध नहीं लड़ सकते तो फिर..
क्यों सेनापति बन जाते हो…
ऐसा क्या अपराध किया जो..
अपनों से नजर चुराते हो..
याद रहे जो युद्ध से भागे..
कायर वो कहलाते हैं..
पीठ में गोली उनको लगती..
सम्मान नहीं वो पाते हैं..
अहंकार के मद में चूर..
अभिमानी दंभ भर जाते हो..
ऐसा क्या अपराध किया जो..
अपनों से नजर चुराते हो..
चोर अगर है दिल में तो फिर..
क्यों बड़ा ह्रदय दिखलाते हो..

सचिन राणा हीरो
हरिद्वार( उत्तराखंड )

0 0

matruadmin

Next Post

प्रेरणा परिवार काव्य गोष्ठी

Wed Feb 5 , 2020
हिसार.नवोदित लेखकों को मंच प्रदान कराने के उद्देश्य से पिछले इक्कीस साल से चलाए जा रहे मासिक काव्य गोष्ठी कार्यक्रम के अन्तर्गत नगर की प्रमुख साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था प्रेरणा परिवार की फरवरी माह की मासिक काव्य गोष्ठी स्थानीय टाऊन पार्क मे संस्था निदेशक शुभकरण गौड़ की अध्यक्षता में आयोजित […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।