हिन्दी साहित्य पत्रिका

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सदिनामा पत्रिका कोलकाता से प्रकाशित होती हे,उसके संपादक जितेंद्र जितांशु एक अच्छे निडर संपादक हे।हमारीपहचन उनसे सदिनमा के मद्यमसे ही हुई हे। माहे दिसंबर २०१९ का सदिनमा का अंक प्रापतहुआ खुशी हुई। हम अभी अभी समीक्षा लिखने मे ज्यादा प्रेरित हो गए हे।
इस अंक मे २८ पेज हे,लेकिन उसमे जो भी लेख चयन किए गए हे बहुत ही उम्दा हे। संपादक जी ने संपादकीय लेख मे सरकार एन आर सी के लिए लोगो का भ्रम दूर करने का सुझाव दिया हे।१९३५ से १९७१ तक लगातार आनेवाले बंगाली विस्थापित हे। शरणार्थी हे। उनका भ्रम एन आर सी के लिए हे,सरकार उनका ये भ्रम दूर करे। कोलकाता मे बंगाली शरणार्थी बसाये गए हे,कोलकाता के ज़्यादातर लेंड जमीन कॉलोनी हे,वह किसी को जमीन खरीद ने की इजाजत नहीं हे। भारत सरकार ने उन्हे दूसरे प्रांतो मे भी बसाया हे। जिन मे एक जगह ‘द्णड़ा कारण्य ‘हे। आज नागरिकता कानून से उन्हे दर लग रहा हे,उन्हे विस्थापित किया जाएगा या फिर नागरिकता दी जाएगी। उसमे हिन्दू नहीं मुसलमान भी हे। आज एन आर सी के विरोध मे आंदोलन की तैयारी हो रहा हे,जो बाद मे केंद्र के खिलाफ या फिर हिन्दीभाषा आंदोलन मे भी बदल सकता हे।
कलाकार टेजेंद्र शर्मा (लंदन यूके ) के फेस बूक पर प्रतिकृया ‘भोपाल से लंदन लौटकर मे दी गई हे। आंतर रास्त्रीय साहित्य एवं क्ला सम्मेलन मे की गई अनुभूति का सुंदर वर्णन किया गया हे।
जब लोग अपना मोबाइल नंबर भूल जाते हे तब केसे पता लगाए उस कंपनी के नंबर यहा एक लेख मे दिये गए हे.
कमलेश भारतीय द्वारा रत्न गाइड की कहानी देश दर्शा मे दी हे। एक लेख मे सदिनमा के द्वारा चलाये जाने वाले ट्रांस्लेटर कोर्ष की जानकारी दी गई हे। जनवरी २०२० से उसकी शुरुआत होगी। ऑफ एबी के नए चैरमेन श्री हरिमोहन की माननीय रक्षा मंत्री आदरणीय श्री राजनाथसिंघ से मुलाक़ात नई दिल्ली मे ५ सितंबर २०१९ को की गई उसकी सुंदर तस्वीरएक यादगार के रूप मे इस अंक मे दिया गया हे।
एक विदुषी पतिता की आत्म कथा लेखिका डॉ मुन्नी गुप्ता ने दी हे,यह आत्म कथा मूल रूप से बंगला जुबानी मे सान १९२९ मे छपी थी। अफसाने को बारह हिस्से मे बंता गया हे। बाल्यावस्था ,किशोरावस्था ,पलायन भ्रम दूर हुआ,पाप का रास्ता ,देह विक्रय समाज का चित्र,अग्नि खेल,कीचड़ के घेरे मे,अभिनव पाठ,मिस मुखर्जी,टी पार्टी,और गार्डन पार्टी,। लेखिका अपनी पसंदगी का मजमून इनहि मे सिमी सिलेवार कहती हे । यह वृतांत पढ़ने मे जरा भी एहसास नहीं होता कीसे किसी मामूली स्त्री ने लिखा हे। वो भी एक वेश्या ,लगता हे की,पूरी दस्ता किसी मजे हुए कलमकार के रूमानी फमाशी और जादुई कलाम से निकली।
डॉ मोहमद ज़ाहिद ने यूरोप की सफर का सुंदर वर्णन किया हे। यूरोपियन लिटररी सर्किल की ‘जानिब दे मोरखा ११ ‘अक्तूबर से १३ अक्तूबर को डेन्मार्क के कोपनहेगन शहर मे सेह हॉप बेनूल अकादमी उर्दू कॉन्फ्रेंस राखी गई थी। जर्मनी गए और बर्लिन शहर भी उनहो ने देखा । लंदन की यात्रा का वर्णन दिया गया हे।
संपादक जीतें जितांशु ने समाज सेवा लेख मे बताया हे की,मारवाड़ी रिलीफ़ सोसाइटी कोलकाता के नए थेरपी सेंटर का उदघाटन स्वास्थ्य के लिए और स्वस्थ्य स्कीम की शुरुआत की गई हे। उसकी जानकारी दी गई हे। ये जनहित मे सोसाइटी का ये बड़ा कदम हे,उसकी जानकारी देना जरूरी समजा हे। इसे लोगो तक पाहुचना जरूरी हे।
संविधान विषय पर प्रदर्शनी और सेमिनार का आयोजन कोलकाता के संचार ब्यूरो पत्र सूचना कार्यालय और बिरला औदयोगिक ,प्रयोगिक ।संस्था के सहयोग से २६ नवंबर २०१९ संविधान दिवस आयोजा कार्यक्रम रखा गया था। उसकी भी जानकारी दी गई हे,
भक्ति एवं दर्धन लेख मे,’रहस्यो से घिरे भगवान जगन्नाथ एकतमकता के प्र्तिल आलेख मे संपादक ने बताया हे की, रहस्यो से घिरे भगवान जगन्नाथ सर्वा शक्तिमान के प्रतिकमक प्रतिनिधित्व के बीच की अवधारणा हे। श्री जगन्नाथ की तुलना उनके अनूठे विन्यास संग्नात्मक क्षमता और संरचित अनुस्थान परंपरा की शृंखला के कारण किसी अन्य प्रतिनिधित्व से नहीं की जा सकती हे,श्री जगन्नाथ की विशीसटता की याख्या करने और श्री जगन्नाथ के साथ भी रामकृष्ण परमहंस के संबंध का इंगित करने के लिए यहा एक प्रयास किया गया हे। इस लेख के लेखक शेख मकबूल इस्लाम बंगाली प्रोफेसर हे। वे जगन्नाथ शोध रिसर्च के लिए ,नए कलेवर अवार्ड २०१५ से उन्हे सम्मानित किए गए हे। उसका अनुवाद राजू कुमार ने किया हे।
राम पुनियानी का एंग्रेजी से हिन्दी मे रूपान्तरण अमरीश हर्डेनीय ने किया हे। हिन्दू मुसलमान और भगवान लेख का अंकलन दिया गया हे। आर एस एस देश का मात्र एक संगठनहे जो यह दावा कर रहा हे किंवह एक संस्कृतिक संस्था हे। परंतु देश की केंद्रीय सरकार के एजंडे का निर्धारण भी करता हे। हिन्दू राष्ट्र के अपने एजेंडा को आगे बढ़ाता हे। देश का सबसे बड़ा संगठन बन गया हे। सर संघ संचालक उसका नियतरन करता हे।
अप्रताक्ष रूप से भाजपा ,व्हिप,बजरंग दल ,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और सारे आर एस एस से संबंध अन्य सेंकड़ों संगठन भी उनकी मुट्ठी मे रहते हे। यह संगठनदेश के विभिन्न हिस्सो मे सामाजिक शैक्षणिक और राज नैतिक व आर्थिक क्षेत्रो मे सक्रिय हे।।

संघ परिवार के सदस्य कुछ कहते आए हे की,या कह रहे हे,,की भारतीय संविधान के आत्मा के विरूध्ध हे। संविधान कहता हे “भारत अरथा इंडिया राज्यो का संघ होगा। उसमे भारत मटा कहा से आई?
भागवत जी राणा प्रताप के अकबर के साथ हुए युद्धधों को भारतीय स्वधिनता संग्राम का हिस्सा बताते हे। राणा प्रताप अपनी मंस बदहि के लिए लड़ रहा था। एंग्रेजों के खिलाफ नहीं ।अगर हम भागवत की बात माने तो हर मुसलमान राजा के खिलाफ यूध्ध स्वधिनता संग्राम हे। वे यह भी जानते हुए कह रहे हे की राणा प्रताप के साथ अकबर के युद्धधों मे अकबर की सेना का नेतृत्व राजा मानसिंह के हाथो मे था। और राणा की तरह बहुत मुसलमान लड़े थे।
अंत मे सलाह लेख मे मोबाइल के खतरे बताए गए हे। मोबाइल फोन टॉइलेट मे न ले जाने को बताया हे,टॉइलेट मे बेकटेरिया होते हे वे मोबाइल के साथ स्वस्थ्य को असर करता हे। नीता अनामिका ने ये सलाह दी हे।
कलर पेज पर पुस्तक १५० बा बापुजी ,अरविंद मोहन,दलाल की बिश रवि कुले,औघड़ नीलोत्पर मृणाल ,की जानकारी दी गई हे।
एक प्रेस कहानी मेरी माँ ,रविन्दरा सिंह बफन यात्रा वृतांत ट्वेल्थ फ़ेल मसाला चाय दिव्य प्रकाश दुबे,की पुस्तक की तस्वीर छपी हुई हे,

#गुलाबचन्द पटेल

परिचय : गांधी नगर निवासी गुलाबचन्द पटेल की पहचान कवि,लेखक और अनुवादक के साथ ही गुजरात में नशा मुक्ति अभियान के प्रणेता की भी है। हरि कृपा काव्य संग्रह हिन्दी और गुजराती भाषा में प्रकाशित हुआ है तो,’मौत का मुकाबला’ अनुवादित किया है। आपकी कहानियाँ अनुवादित होने के साथ ही प्रकाशन की प्रक्रिया में है। हिन्दी साहित्य सम्मेलन(प्रयाग)की ओर से हिन्दी साहित्य सम्मेलन में मुंबई,नागपुर और शिलांग में आलेख प्रस्तुत किया है। आपने शिक्षा का माध्यम मातृभाषा एवं राष्ट्रीय विकास में हिन्दी साहित्य की भूमिका विषय पर आलेख भी प्रस्तुत किया है। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय(दिल्ली)द्वारा आयोजित हिन्दी नव लेखक शिविरों में दार्जिलिंग,पुणे,केरल,हरिद्वार और हैदराबाद में हिस्सा लिया है। हिन्दी के साथ ही आपका गुजराती लेखन भी जारी है। नशा मुक्ति अभियान के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी दवारा भी आपको सम्मानित किया जा चुका है तो,गुजरात की राज्यपाल डॉ. कमला बेनीवाल ने ‘धरती रत्न’ सम्मान दिया है। गुजराती में‘चलो व्‍यसन मुक्‍त स्कूल एवं कॉलेज का निर्माण करें’ सहित व्‍यसन मुक्ति के लिए काफी लिखा है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।