ड्रीम गर्ल छोटी दुकान मीठा पकवान,हँसाती, गुदगुदाती, प्रेम कहानी

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ड्रीम गर्ल
छोटी दुकान मीठा पकवान,हँसाती, गुदगुदाती, प्रेम कहानी
लेखक, निर्देशक
राज शांडिल्य
अदाकार
आयुष्मान खुराना, नुसरत भरुचा, मनजोत सिंह, अन्नू कपूर, विजय राज, अभिषेक बनर्जी, राजेश शर्मा, मनजोत सिंह,
हँसती, गुदगुदाती, प्रेम कहानी
■मुख्तसर ख्याल समीक्षा से पहले,
आपने लैला मंजनू, शीरी फरहाद, रोमियो जूलियट, हीर रांझा के बारे में सुना ही होगा
लेकिन वर्तमान समय मे एक नया प्रेम पाश्चात्य देशों की देन है प्लेटोनिक लव(अफलातूनी प्रेम), तो हम हमारे पाठकों को बता दे ये एक ऐसा प्रेम है जिसमे जिस्म का मिलना ज़रूरी नही होता बस भावनाए मिलना चाहिए, फ़िल्म में इसी अदृश्य प्रेम के ज़रिए आप के लिए परिस्थिति जन्य (सिचुएशनल)हास्य पैदा किया गया है जो आपको निश्चित ही गुदगुदाते हुवे हंसाएगा भी, आपने कई बार समाचार पत्र के किसी कोने पर देखा होगा विज्ञापन “मीठी बाते” या करेफ्रेंडशिप काल तो यह एक ऐसा संसार है जहां अकेले इंसान से लड़की मीठी बाते करती है और वह अकेलेपन को झेल रहा शख्स अपनी हर बात उस फोन वाली लड़की पर उंडेल देना चाहता है यह एक काल्पनिक संसार बन जाता है उस शख्स का, यही विषय को राज शांडिल्य ने बड़े हास्य-रोचक अंदाज़ में फ़िल्म में पिरोया है
■कहानी
एक बेरोजगार युवक करण(आयुष्मान) लड़की की आवाज़ निकालने में माहिर है तो रामलीला में सीता के किरदार में फ़ीट बैठता है, उसकी नोकरी एक फ्रेंडशिप काल सेंटर जिसका मालिक छोटू(राजेश शर्मा) के वहा लग जाती है, अब चूंकि कारण लड़की की आवाज़ निकालने में माहिर है तो वह फोन पर अलग अलग लोगो को लड़की बन बेवकूफ बनाता है और पूजा बन कर कर बात करता है, उसमे चंद लोग खास है, जिसमे एक उसके खुद के विदुर पिता(अन्नू कपूर), एक रंग-बिरंगा करोड़पति लड़का, एक शायर मिज़ाज पत्नी से बदहाल पोलिस वाला(विजय राज), प्रेमिका का भाई(विराज), एक बाल ब्रह्मचारी युवक(शशि रंजन), लड़को के प्यार में धोखा खा चुकी एक लड़की(निधि बिष्ट) भी शामिल है,
इन सब के साथ चल रहे बवाल के साथ साथ करण का सच्चा प्रेम डॉली(नुसरत भरुचा) से भी फलफूल रहा है,
ठेर सारा कन्फ्यूजन, डिप्रेशन, केलकुलेशन, जेंडर कन्फ्यूजन का क्लियरिफिकेशन के साथ कामेडी काअजीबो गरीब तड़का है फ़िल्म में
अब ये सब कैसे स्पष्ट होगा असली प्रेमी कैसे मिलेंगे, टेलीफोनिक प्रेम वाले लोगो से करण उर्फ पूजा कैसे निपटेगी इस सवाल के जवाब के लिए फ़िल्म देखना पड़ेगी, तो देख ही लीजियेगा
■अदाकारी
आयुष्मान खुराना या तो बेहद बहादुर अदाकार है या वह खुद को साबित करने के लिए कुछ भी कर गुजरने का जुनून रखते है यहां भी उन्होंने पूजा वाले किरदार में खुद को बखूबी ठाल लिया फिर चाहे आंगिक अभिनय हो या चेहरे की भाव भंगिकाए(फेशियल एक्सप्रेशन) पर लाजवाब काम कर गए है, नुसरत के पास सुंदर दिखने से ज्यादा कोई काम था नही उसने वही किया, अन्नू कपूर अनुभव के साथ पारंगत अभिनेता है जिनकी कॉमिक टाइमिंग बेमिसाल है, विजय राज वह अदाकार है जो बिना संवाद के भी पर्दा लूटने का माद्दा रखते है, धागाला लागली गाने में रितेश की कैमियो सुखद लगता है,
■संगीत
मीट ब्रदर्स ने गाने संगीत में पिरोए है, यहां गाने फ़िल्म को आगे बढ़ाने का काम करते नज़र आते है| जो किसी भी फ़िल्म के लिए कारगर होते है
गाना एक मुलाकात अच्छा बना है लेकिन रष्के कमर की याद ताजा करता हैं,
■बजट-प्रदर्शन
निर्माण वितरण, विगापन मिला कर 30 करोड़₹ जो कि आसानी से निकल जाएगा,
1800-2000 स्क्रीन्स पर प्रदर्शन हो रहा है,
पहले दिन 3 से 7 करोड़ की ओपनिंग ले सकती है जो दिन ब दिन ग्राफ बढ़ता लग रहा हैं, फ़िल्म 100 करोड़ क्लब में जाने की कुव्वत रखती हैं जो शने शने पहुच ही जाएगी,,,
■अंत मे
फ़िल्म को राज शांडिल्य ने लिखा और निर्देशन किया है, राज वही लेखक है जो कि कामेडी सर्कस टीवी शो लिखा करते थे, यहां भी उनके एक पंक्ति संवाद गुदगुदाते हुवे हँसा देते हैं, बालाजी प्रोडक्शन हाउस के जुड़ने के बाद भी फ़िल्म में वल्गर संवाद या दृश्य नही है जो फ़िल्म की रोचकता को बरकरार रखते हुवे पारिवारिक बनाते है, शुद्ध मसाला फ़िल्म है जो आपको पूरा पैसा वसूल मनोरंजन देगी,
साहो, छिछोरे की सफलता अभी बरकरार है सिनेमाघरों में, पर यह फ़िल्म अपना असर दिखा जाएगी और दर्शको को समेट लाएगी
फ़िल्म के साथ एक और बेहद संजीदा विषय की फ़िल्म सेक्शन 375 भी प्रदर्शित हो रही हैं परंतु दोनो फ़िल्म के दर्शक वर्ग अलहदा अलहदा है,
हमारी नज़र में फ़िल्म है छोटी दुकान मीठा पकवान
■स्टार्स
3.5

#इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| इनका परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।