मां की ममता

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vikram
है स्नेह अगाध से भरा हृदय
गजब है सहने की क्षमता
एक ओर दुनिया सारी
एक ओर है मां की ममता
है मां दुनिया में परमेश्वर की
कृति सबसे प्यारी
सब रिश्तों में सब नातों में
मां ही सबसे न्यारी
मां की महिमा क्या बतलाउं
बस इतना कहता हूं
 दुनिया है कांटों का जंगल
मां खुशियों की फुलवारी
चाहे कुछ हो दिल से उसके
प्रेम नहीं है कमता
एक ओर दुनिया सारी
एक ओर है मां की ममता
राहों से कांटें चुन चुन के
स्नेह सुमन बो देती
मां ही है जो बच्चों के
दु:ख में है रो देती
त्याग शब्द भी है फीका
मां के त्याग के आगे
मां तो मां बनने की खातिर
सुंदरता है खो देती
बच्चों को छोड़कर और कहीं न
मन मां का है रमता
एक ओर दुनिया सारी
एक ओर है मां की ममता
है स्नेह अगाध से भरा हृदय
गजब है सहने की क्षमता
एक ओर दुनिया सारी
एक ओर है मां की ममता
विक्रम कुमार 
 वैशाली(बिहार)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।