प्रहार हो

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avinash tiwari
तड़प उठा है हिंदुस्तान
दहक रही सीने में ज्वाला है।
नापाकी तेरी करतूतों ने
  ह्रदय छलनी कर डाला है।
जब भी हमने दोस्ती का पैगाम
आगे लाया है।
खूनी होली खेलकर तूने कायरता
दिखाया है।
अब शब्दबाण से नही
      अग्नि वर्षा से बात होगी।
शहीदों की शहादत
यूँ न जाया होगी।।
काट लेंगे अब वो सर
 जो आज़ादी का खेल खेलता है।
कश्मीर के सेना पर पत्थर जो फेकता है।
निगाहे ढूंढ़ रही मानवधिकार के पैरोकारों को
ताले पड़े है मुंह में उनके
  आतंकी पहरेदारों को।
भारत माँ के लाल आज
तिरंगे में लिपटे सोये हैं।
स्तब्ध है मानवता
अमन में जहर तूने घोले हैं।
होगा विकराल अंजाम
सुन नापाक पाक
विश्व के नक्शे से
अब होगा तू साफ।
पीठ पीछे खंज़र चलाना
तेरी खून में शामिल है
हिंदुस्तान के शेर जागो
अब पाकी गीदड़ों की बारी है।
अब प्रहार अमिट होगा
अन्तिम निर्णय शीघ्र होगा
अखण्ड भारत का परचम
शान से फहराएगा
चीर कर सीना तेरा
लाहौर में तिरंगा लहराएगा।।
#अविनाश तिवारी
जांजगीर चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।