पुलवामा हमले के एक सप्ताह बाद देश का मिजाज

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देश के लिए पुलवामा हमले के दर्द से उबर पाना आसान नहीं है। 46 वीर जवानों की शहादत लंबे समय तक टीस देती रहेगी…
पिछले सप्ताह इस आतंकी हमले के दौरान मातृभूमि के लिए जान न्योछावर करने वाले वीर जवानों की शहादत से पूरे देश में शोक का माहौल बना। सबों की भावनाएं आहत हुईं। हर किसी ने उन वीर शहीदों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की… शोक संतप्त परिवारों के साथ सहानुभूति जतायी…
देश के तमाम लोग, अनेकों संघ-संगठन आज भी अपने अपने तरीके से शोक प्रकट कर रहे हैं…इस कायराना हमले के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं…स्वतंत्र भारत के इतिहास में जनमानस की भावनाओं का ऐसा सैलाब कुछ बार ही देखने को मिला है।
यह सब एक स्वतःस्फूर्त भाव है जिसका सम्मान किया जाना चाहिए।
लेकिन इस घटना को लेकर सोशल मीडिया में तरह तरह के भ्रामक पोस्ट भी आ रहे हैं … अफवाहें भी फैलायी जा रही हैं…इस बीच महाराष्ट्र में कश्मीरी छात्रों से मारपीट की खबर भी आई… जम्मू कश्मीर के अंदर देश विरोधी नारे भी चर्चा में रहे…इन सब के साथ कुछ गैरजरूरी ट्वीट और असंवेदनशील बयान भी मिडिया में आये…
ऐसे समय में छोटी घटना भी सोशल मिडिया में वायरल होकर बड़ा रूप ले रही है…इनसे बचने की भी आवश्यकता है और सतर्क रहने की भी। कुछ लोग इसी बहाने हमारी भावनाओं को भड़काने की कोशिश करते हैं…हमारे सामाजिक तानेबाने को तोड़ने की कोशिश करते हैं।
आज हम सब को यह समझना भी जरूरी है कि ऐसी बातें उन लोगों की साजिश का हिस्सा भी हो सकती हैं जो देश में रहकर देश को तोड़ने का काम करते हैं। अभी संयम बरतने की सबसे अधिक आवश्यकता है। शांति और सद्भाव हर कीमत पर जरूरी है।
सरकार अपने स्तर से अपना काम कर रही है।
प्रधानमंत्री भी लोगों के दिल के अंदर उठ रहे उबाल को समझ रहे हैं लेकिन सरकार का हर कदम संतुलित और सुनियोजित ही होना चाहिए।
सेना निर्णायक कार्रवाई करने की तैयारी में है। देश में रहकर देश की संप्रुभता के लिए खतरा बने लोगों का सर्च ऑपरेशन जारी है। उन्हें सबक जरूर मिलेगा। देश को अपनी सेना पर पूरा भरोसा है।
दुनिया के कई शक्तिशाली देश आतंक के खिलाफ इस जंग में भारत के साथ खड़े हैं। कुछ खास लोगों की सुरक्षा में लगे सुरक्षा बलों को हटाया गया है। पाक को अलग थलग करने का कूटनीतिक प्रयास जारी है। कई प्रतिबंध भी लगाये गए हैं…
शोक और आक्रोश के इस कठिन समय में
इन तमाम हालातों से रूबरू होते हुए हम सभी को अपने स्तर से एक और काम जरूर करना चाहिए…उन वीर शहीदों को नमन करते हुए उनके परिवार को किसी न किसी रूप में सहयोग जुटाने का…
हम चाहे जिस भी व्यवसाय या पेशे से जुड़े हों, कम से कम अपने एक दिन की कमाई उन शहीदों के परिवार को भेंट करें ताकि उन्हें यह महसूस हो सके कि उन्होंने एक बेटा तो जरूर खोया लेकिन देश के करोड़ों बेटे उनके साथ हैं…
भारत माँ के वीर सपूतों को शत शत नमन…

#डॉ. स्वयंभू शलभ

परिचय : डॉ. स्वयंभू शलभ का निवास बिहार राज्य के रक्सौल शहर में हैl आपकी जन्मतिथि-२ नवम्बर १९६३ तथा जन्म स्थान-रक्सौल (बिहार)है l शिक्षा एमएससी(फिजिक्स) तथा पीएच-डी. है l कार्यक्षेत्र-प्राध्यापक (भौतिक विज्ञान) हैं l शहर-रक्सौल राज्य-बिहार है l सामाजिक क्षेत्र में भारत नेपाल के इस सीमा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए कई मुद्दे सरकार के सामने रखे,जिन पर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न मंत्रालयों ने संज्ञान लिया,संबंधित विभागों ने आवश्यक कदम उठाए हैं। आपकी विधा-कविता,गीत,ग़ज़ल,कहानी,लेख और संस्मरण है। ब्लॉग पर भी सक्रिय हैं l ‘प्राणों के साज पर’, ‘अंतर्बोध’, ‘श्रृंखला के खंड’ (कविता संग्रह) एवं ‘अनुभूति दंश’ (गजल संग्रह) प्रकाशित तथा ‘डॉ.हरिवंशराय बच्चन के 38 पत्र डॉ. शलभ के नाम’ (पत्र संग्रह) एवं ‘कोई एक आशियां’ (कहानी संग्रह) प्रकाशनाधीन हैं l कुछ पत्रिकाओं का संपादन भी किया है l भूटान में अखिल भारतीय ब्याहुत महासभा के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विज्ञान और साहित्य की उपलब्धियों के लिए सम्मानित किए गए हैं। वार्षिक पत्रिका के प्रधान संपादक के रूप में उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए दिसम्बर में जगतगुरु वामाचार्य‘पीठाधीश पुरस्कार’ और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अखिल भारतीय वियाहुत कलवार महासभा द्वारा भी सम्मानित किए गए हैं तो नेपाल में दीर्घ सेवा पदक से भी सम्मानित हुए हैं l साहित्य के प्रभाव से सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-जीवन का अध्ययन है। यह जिंदगी के दर्द,कड़वाहट और विषमताओं को समझने के साथ प्रेम,सौंदर्य और संवेदना है वहां तक पहुंचने का एक जरिया है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।