हिंदी देश का वासी हूँ

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aalok vashishth
मैं हिंदी देश का वासी हूँ,
पर अंग्रेजी भाषी हूँ!
जब मद-महफ़िल में होता हूँ,
डूड पुकारा जाता हूँ।
आधी रात गए जब नाईट पार्टी से घर आता हूँ,
सामने वाली खिड़की से चिरकुट पुकारा जाता हूँ।
कभी फ़ेसबुक,कभी व्हाट्सएप, कभी यूट्यूब में फिरता हूँ,
भोर पहर डॉगी को लेकर पार्क में टहलता हूँ।
आधे हरे,आधे लाल बालों में कूल पुकारा जाता हूँ।
कभी विहस्की तो कभी मैं रम-गम में डूबा रहता हूँ,
सोसाइटी वाले शर्मा जी के द्वारा फूल पुकारा जाता हूँ।
दादी अम्मा कहती है तू वीर भगत का वंशज है,
पर पता नहीं क्यों मास्टर जी द्वारा नामाकूल पुकारा जाता हूँ!
परिचय- 
नाम-अालोक कुमार
साहित्यिक उपनाम-अालोक कुमार वशिष्ठ
वर्तमान पता-पकरीबरावां (एरुरी)
राज्य-बिहार
शहर-नवादा
शिक्षा-जारी 12वीं कक्षा में अध्ययनरत
विधा -आलेख/कविता
लेखन का उद्देश्य-सामाजिक बदलाव
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matruadmin

One thought on “हिंदी देश का वासी हूँ

  1. बहुत ही अद्भुत लेखनी का प्रदर्शन हैै।
    समाज में कुछ पल रहे कुरीतियों को अच्छे से दर्शाया गया है। मैं लेखक को धन्यवाद करता हू ऐसी लेखनी के लिए और गुजारिश करता हू की ऐसी ही और लेखनी का समाज के समक्ष पेश करें।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।