रक्षाबंधन (बाल कविता)

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suresh sourabh

भाई बहन का प्रेम अमर
रक्षाबंधन दरसाता है
भाई न रूठे बहन से
यह हमें सिखाता है।
रूचना रोली से बहनें
भाई का भाल सजातीं हैं
बॉध कलाई में डोरी
मुंह मीठा करातीं हैं।
बहनें भाई से पैसे पाकर
आशीषें दें मुस्कातीं हैं।
#सुरेश सौरभ
लखीमपुर खीरी उ० प्र०

matruadmin

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