मैं ऐसे ही ठीक हूँ

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kapil jain

मैं ऐसे ही ठीक हूँ
थोड़ी सी खुशी देकर
फिर दुख मेरे और
बढ़ाया मत करो
मेरे लब बेजान ही सही
दो पल की हँसी देकर
फिर मुझे और
रुलाया मत करो
मेरे सीने में ये खरोंचें ही ठीक हैं
थोड़ा सा फूँक कर
फिर उनमें और नमक
लगाया मत करो
मैं ना-उम्मीद ही ठीक हूँ
थोड़ी सी उम्मीद जगा कर
फिर मुझे और डराया मत करो
आँखों में छोटे-छोटे ख़्वाब ही ठीक हैं
बड़े ख़्वाब दिखा कर
फिर उन्हीं के टुकड़े चुभाया मत करो

 #कपिल कुमार जैन
परिचय : कपिल कुमार जैन का जन्म १९८६ में  टोडारायसिंह ( टोंक) में हुआ है। वर्तमान में आप बाजार न. 2 भोपालगंज (भीलवाड़ा,राजस्थान) में बसे हुए हैं। बी.कॉम.(अजमेर) की पढ़ाई के बाद आपका ग्रेन मर्चेन्ट एण्ड कमीशन एजेन्ट का व्यवसाय है। आप मूल रुप से काव्य लेखन करते हैं। प्रकाशित संग्रह में  विरह गीतिका,धूप के रंग, फिर खिली धूप,काव्य सकंलन आदि हैं।अंजुरी, पावनी,निर्झरिका काव्य संकलन भी निकले हैं तो पुष्पगन्धा भी है।

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।