मैं ऐसे ही ठीक हूँ

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kapil jain

मैं ऐसे ही ठीक हूँ
थोड़ी सी खुशी देकर
फिर दुख मेरे और
बढ़ाया मत करो
मेरे लब बेजान ही सही
दो पल की हँसी देकर
फिर मुझे और
रुलाया मत करो
मेरे सीने में ये खरोंचें ही ठीक हैं
थोड़ा सा फूँक कर
फिर उनमें और नमक
लगाया मत करो
मैं ना-उम्मीद ही ठीक हूँ
थोड़ी सी उम्मीद जगा कर
फिर मुझे और डराया मत करो
आँखों में छोटे-छोटे ख़्वाब ही ठीक हैं
बड़े ख़्वाब दिखा कर
फिर उन्हीं के टुकड़े चुभाया मत करो

 #कपिल कुमार जैन
परिचय : कपिल कुमार जैन का जन्म १९८६ में  टोडारायसिंह ( टोंक) में हुआ है। वर्तमान में आप बाजार न. 2 भोपालगंज (भीलवाड़ा,राजस्थान) में बसे हुए हैं। बी.कॉम.(अजमेर) की पढ़ाई के बाद आपका ग्रेन मर्चेन्ट एण्ड कमीशन एजेन्ट का व्यवसाय है। आप मूल रुप से काव्य लेखन करते हैं। प्रकाशित संग्रह में  विरह गीतिका,धूप के रंग, फिर खिली धूप,काव्य सकंलन आदि हैं।अंजुरी, पावनी,निर्झरिका काव्य संकलन भी निकले हैं तो पुष्पगन्धा भी है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।