नाचते हैं पेड़, गाते हैं पौधे, झूम के मतवाले मस्त हुए जाते हैं। तपती हुई धरती के संतप्त प्राणी, ख़ुशी के इज़हार को दोहराए जाते हैं। धूल के हैं रंग गुलाल, हवाओं के जोश जश्न, मौसम के स्वागत में व्याकुल आतुर होकर, सभी जैसे प्रियवर का मिलन गीत गाते हैं। […]

उतरी बरखा, भीगी धरती, हरियाली चहूँ ओर छाई। ज्यों मंदिर में बजी घण्टियाँ, त्यों यौवन ने ली अँगड़ाई।। झूले पड़े हर कदम की डाल, झूलने चले सब हंस की चाल। माँग सिंदूर, बिन्दिया सजी भाल, भाई बने सब ही बहना की ढाल।। लगी जैसे ही सावन की झड़ी, मन मयूरा […]

रिमझिम–रिमझिम बरसता पानी रिमझिम–रिमझिम पानी की बूंदें, देखो कितनी उन्मादित करतीं। नयी–नयी कोंपलों को देखो मानो सीपों से भर देतीं। मधुवन की हरियाली देखो, गोरी के सजीले नयनो को देखो। मदमस्त मुखड़े की शौहरत को देखो बलखाती–सी ज़ुल्फ़ों को देखो। घूंघट में पग डोलते हुए, शर्माती हुई, लजाती हुई, आती […]

सावन भू तल मेघ गिरे जल, दृश्य अलौकिक नैनन आगे। प्यार ढरे वसुधा मधु आँचल, नेह झड़ी धरती रस जागे। श्याम घटा बरसे मन भावन, संग बयार लुभावन भागे। अंबर नेह भरे चित पावन, मुग्ध धरा वधु लज्जित लागे। बुद्धि प्रभा बन देख रही तम, छूट रहा अब तामस ऐसे। […]

झरझराता सावन भिगोती वो फुहारें तीज हरियायी सावनाई इठलाई सलोनी नीम पुरवाई घेवर- सिवइयाँ रेशमी राखियों की रेशमाई झरझराती पीली निंबोलियाँ बहुत कुछ समेट लाईं मेघों पर सवार मन बावरा उड़ चला उड़ चला सुदूर दूर जहाँ था नन्हा बचपन माँ का आँचल और माँ के आँगन में खेलती नन्ही […]

पहला सावन का सोमवार भोले बाबा का है द्वार शांत मन से की गई पूजा है स्वीकार सब भक्तन का करते बेड़ा पार ओम नमः शिवाय की धुनि रमाए बारंबार………. अर्धचंद्र मस्तक पर विराजे जटा से निकली गंगा की धार गले में सर्पों की माला, भस्म अंग सुहावे पहन मृगछाला, […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।