कभी हँसते हुए छोड़ देती ये जिंदगी… …कभी रोते हुए छोड़ देती ये जिंदगी…। …न पूर्णविराम सुख में, …न पूर्णविराम दुःख में ..बस जहाँ देखो वहाँ अल्प विराम छोड़ देती है ये जिंदगी..।। प्यार की डोर सजाए रखो, दिल को दिल से मिलाए रखो। क्या लेकर जाना है साथ में, […]

पढ़-लिखकर जब बेटा बेरोजगार होता है तो,माँ बेटे दोनों परेशान होते हैं। एक दिन शाम को बेटा घर लौटता है। यदि घर में आकर कोई बच्चा माँ से कहे-मम्मी,मम्मी, लग गई मां,तो क्या कोई भी सुनेगा! यही सोचेगा कि,कहीं चोट-वोट लग गई होगी। सभी के मन में दुख-दर्द,हताशा, निराशा और […]

रविवार का दिन था। सभी काम निपट चुके थे। जब कुछ नहीं बचा तो सोचा भगवान से मिला जाए। रविवार को सुबह तो भगवान से मिलने हर कोई चला आता है,लेकिन शाम को आरती के बाद कौन जाता है। चुनाव हो चुके थे,भगवान की सारी व्यस्तता समाप्त हो चुकी थी। […]

आज महफिल है हंसी हो, कुछ जवां से आप भी, आज फिर दिल के बहकने का इरादा-सा है क्या। कह नहीं सकते जुबां से, और दिल खामोश है कौन है वो कोई अपना, कोई बेगाना है क्या। है बसा जो एक सपना, आज आँखों में नया आज राही मन्जिलों को […]

है कोइ राब्ता तो रज़ा के बगैर भी, शामिल हैं रूह में वो वफ़ा के बगैर भी। दौलत कमाई’लाख मगर एक सच है ये, हासिल हुआ न सुकुन दुआ के बगैर भी। अक्सर नसीब को मेरे तंहाइयां ही क्यों, ईनाम में मिली है ख़ता के बगैर भी। इतना यकीं तो […]

हैं धन्य हरीश साल्वे जी, जो बने मसीहा भूषण के थूका है आज़ उन्होंने मुँह पर उस स्वराज के भूषण के। ये एक तमाचा ही समझो, पाकिस्तानी मंसूबों पर गहरा हो गया कुठाराघात पाकिस्तानी महबूबों पर। दुनिया देखे अब दौर नहीं, जब हम घुट-घुटकर जीते थे बेबस होते सबके आगे […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।