एक समय की बात है ,एक गांव में रोहन और मोहन नाम के दो लड़के रहते थे और दोनों एक ही विद्यालय में पढ़ते थे ।रोहन बचपन से ही अपने मित्रों की चीजें चुराता था,उसकी मां और पिता ने उन चीजों को देखा पर उन्होंने कभी भी […]
उन्हें नजरअंदाज ना करों जो तुम्हारी बहुत परवहा करते है, वरना एक दिन पत्थर चुनते-चुनते हीरा गवा दोगें। ये कहावत तब चरितार्थ हुई जब मध्यप्रदेश में विधान सभा चुनाव के परिणाम सामने आए। यहां विधायक हराते-हराते लोगों नेे अपनी सरकार ही गवां दी। वह सरकार हरा दी जिसे बनाये रखना […]
नीर धीर दोनोे मिलते थे, सखी-कान्ह परिहास। था समय वही,,अब कथा बने, रीत गये उल्लास। तन मन आशा चुहल वार्ता, वे सब दौर उदास। मन की प्यास शमन करते वे, पनघट मरते प्यास।। वे नारी वार्ता स्थल थे, रमणी अरु गोपाल। पथिकों का श्रम हरने वाले, प्रेमी बतरस ग्वाल। पंछी […]
जो है नही वह दिखना क्या सच पर पर्दा करना क्या झूठी मान मर्यादा के लिए बनना क्या संवरना क्या यौवन आया चला जायेगा फिर अकड़ना क्या इतराना क्या बुढ़ापा आएगा आकर रहेगा फिर डरना क्या घबराना क्या जिंदा सदा रहा नही कोई फिर मौत को बुरा बताना क्या जिसने […]
परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है”, परन्तु परिवर्तन का क्रम क्या होना चाहिए यह भी निर्भर होना चाहिए , आज-कल के अंकुरित पौधे जिनकी वृद्धि नियमानुसार ना होकर अन्य साधनों से बड़ाई जा रही है अर्थात वर्तमान के बच्चे जो उनकी उम्र से कहीं अधिक सोचने लगते है | सोच […]
लावणी छंद* (शिल्प:-16+14=30 , दो दो चरणों में समतुकांत, चरणांत में लघु,दीर्घ मात्रा का बंधन नहीं होता) शस्य श्यामला इस धरती को, आओ मिलकर नमन करें। पेड़ लगाकर उनको सींचे, वसुधा आँगन चमन करें। स्वच्छ जलाशय रहे हमारे, अति दोहन से बचना है। पर्यावरणन शुद्ध रखें हम, मुक्त प्रदूषण […]
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए।
आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं।
कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।